तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के 19 बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन सांसदों को 'गद्दार' बताते हुए चुनौती दी है कि वे सभी इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर दिखाएं।
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी के बागी सांसदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बागियों को 'गद्दार' करार देते हुए चुनौती दी कि वे सांसद पद से इस्तीफा दें और बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ें। महुआ ने यह भी कहा कि इन बागी सांसदों को कानून की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह तीखी टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर की।

महुआ मोइत्रा ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, "TMC के गद्दार विधायकों (यहां उनका मतलब सांसदों से था) को कानून नहीं पता। 2003 के 91वें संविधान संशोधन ने 'विभाजन' या 'विशेष समूह' वाले नियम को खत्म कर दिया है। सांसदों की संख्या यहां कोई मायने नहीं रखती। नियम यह है कि मूल राजनीतिक पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करें। इन 19 गद्दारों को इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए।"
महुआ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के 19 बागी सांसदों ने लोकसभा में अपने लिए अलग बैठने की जगह की मांग की है। इन अटकलों को भी हवा मिल रही है कि ये बागी सांसद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को अपना समर्थन दे सकते हैं।
इस बागी खेमे का नेतृत्व पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। उनके गुट का दावा है कि उनके पास 19 लोकसभा सांसदों और 64 विधायकों का समर्थन है। हाल ही में, इन 19 सांसदों की एक लिस्ट लोकसभा स्पीकर को सौंपकर अलग सीटों की मांग की गई थी।
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले इस बागी गुट में शताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिता सरकार, प्रसून बंदोपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रबर्ती, रचना बनर्जी, सायनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक जैसे सांसद शामिल हैं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस राज्यसभा में भी मुश्किलों का सामना कर रही है। हाल ही में पार्टी के तीन राज्यसभा सांसदों- सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रे और प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
