Fort Hood Attack 2009: अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि 2009 में फोर्ट हुड में 13 लोगों की जान लेने वाले मेजर निदाल हसन को 3 दिसंबर को मौत की सजा दी जाएगी। फायरिंग स्क्वॉड द्वारा दी जाने वाली इस सजा का टीवी पर लाइव प्रसारण किया जाएगा।

America Live Execution Claim: अमेरिका में 2009 के फोर्ट हुड मिलिट्री बेस गोलीबारी मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। खबर में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मामले के दोषी मेजर निदाल मलिक हसन को 3 दिसंबर को मौत की सजा दिए जाने का ऐलान किया है। साथ ही, इस प्रक्रिया का टीवी पर लाइव प्रसारण किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

2009 के फोर्ट हुड हमले में 13 लोगों की हुई थी मौत

नवंबर 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर मेजर निदाल मलिक हसन ने गोलीबारी की थी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 32 अन्य घायल हो गए थे। मृतकों में 12 अमेरिकी सैनिक शामिल थे।

यह घटना अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुई सबसे घातक गोलीबारी की घटनाओं में गिनी जाती है। इस मामले ने अमेरिकी सेना की सुरक्षा व्यवस्था और सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक बहस छेड़ी थी।

अमेरिका में सार्वजनिक फांसी का इतिहास

अमेरिका में सार्वजनिक रूप से मौत की सजा देने की परंपरा कई दशक पहले समाप्त हो गई थी। अगस्त 1936 में केंटकी के ओवेन्सबोरो में रेनी बेथिया को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। इस घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे।

इसके बाद अमेरिका में सार्वजनिक फांसी का चलन समाप्त हो गया। हालांकि, मौत की सजा कुछ राज्यों और संघीय व्यवस्था में कानूनी रूप से बनी रही। सार्वजनिक रूप से सजा देने और जेल के भीतर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सजा लागू करने में अंतर है।

फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा कैसे दी जाती है?

फायरिंग स्क्वॉड मौत की सजा देने का एक तरीका है, जिसमें कई प्रशिक्षित निशानेबाज एक साथ गोली चलाते हैं। इसकी प्रक्रिया संबंधित क्षेत्र के कानून और तय नियमों के अनुसार होती है।

अमेरिका में यह तरीका लंबे समय तक बहुत कम इस्तेमाल हुआ। 1976 में मौत की सजा बहाल होने के बाद कुछ मामलों में फायरिंग स्क्वॉड का उपयोग किया गया है। हालांकि, किसी खास मामले में इसी तरीके से सजा दिए जाने का दावा तभी पुष्ट माना जा सकता है, जब संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध हो।

लाइव प्रसारण के दावे पर क्यों उठते हैं सवाल?

मौत की सजा को सार्वजनिक रूप से दिखाने या उसका सीधा प्रसारण करने का दावा बेहद गंभीर है। ऐसी किसी योजना के लिए आधिकारिक आदेश, कानूनी प्रक्रिया और प्रसारण से जुड़ी स्पष्ट जानकारी जरूरी होगी।

फोर्ट हुड मामले में 3 दिसंबर की तारीख और लाइव प्रसारण को लेकर किए गए दावों की पुष्टि होने तक इन्हें अंतिम निर्णय के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।