TMC Crisis: ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस्तीफा दे दिया और बागी नेताओं से मुलाकात कर सियासी हलचल बढ़ा दी।
TMC Crisis Latest News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) चीफ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के अंदर चल रही बगावत के बीच अब पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्होंने बागी खेमे के नेताओं से मुलाकात भी की, जिससे सियासी गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चंद्रिमा भट्टाचार्य को लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका इस्तीफा टीएमसी लीडरशिप के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा आखिर क्यों चर्चा में है?
विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में बड़े बदलाव किए थे। इसी दौरान चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल TMC का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने सुब्रत बक्शी की जगह यह जिम्मेदारी संभाली थी। अब अपने इस्तीफे में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि वह राज्य अध्यक्ष पद के साथ-साथ पार्टी में मौजूद अन्य सभी जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग कर रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी के बैंक खातों और चुनाव आयोग से जुड़े अधिकृत प्रतिनिधि की भूमिका से भी खुद को वापस लेने की घोषणा की है।
इस्तीफे के बाद बागी नेताओं से मुलाकात
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इस्तीफा भेजने के कुछ ही समय बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बागी गुट के नेताओं से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि बागी खेमे का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। पार्टी के भीतर पहले से चल रही असंतुष्टि के बीच यह मुलाकात TMC की अंदरूनी स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। यही वजह है कि विपक्ष इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका बता रहा है।
TMC में बगावत कितनी बड़ी?
पार्टी के भीतर बगावत का असर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव में मिले झटके के बाद कई नेताओं और विधायकों ने नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर असंतुष्ट नेताओं को जल्द नहीं मनाया गया, तो TMC को संगठनात्मक स्तर पर और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बागी गुट और ममता समर्थक नेताओं के बीच टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है, जिसका असर आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
TMC कार्यालय पर भी छिड़ी लड़ाई
सियासी ड्रामा सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा। कोलकाता स्थित तृणमूल भवन को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया है। बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर दावा ठोकते हुए खुद को 'असली TMC' बताया। इसके बाद ममता समर्थक नेता भी सक्रिय हो गए और मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। हालात को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती तक करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि पार्टी के अंदर संघर्ष अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है।
बीजेपी ने साधा निशाना
चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद बीजेपी नेताओं ने भी TMC पर हमला तेज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि यह दिखाती है कि तृणमूल कांग्रेस अब गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। विपक्षी दल इसे बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर पेश कर रहे हैं।


