अंकित पांडे ने एक ज़ोमैटो डिलीवरी पार्टनर की मदद की। उसकी मां ICU में भर्ती थीं और उसे तुरंत घर पहुंचना था। अंकित ने 4,000 रुपये की फ्लाइट बुक की, जिससे वह समय पर अपनी मां से मिल सका।

कभी-कभी ज़िंदगी में कुछ अनजान लोग ऐसी मदद कर जाते हैं कि इंसानियत पर यकीन और भी पक्का हो जाता है। ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रही है। अंकित पांडे नाम के एक शख्स ने एक ज़ोमैटो डिलीवरी पार्टनर के लिए 4,000 रुपये की फ्लाइट टिकट बुक की, ताकि वह ICU में भर्ती अपनी मां से मिल सके। अंकित ने खुद यह दिल छू लेने वाला किस्सा सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

अंकित ने बताया कि एक डिलीवरी पार्टनर अक्सर उनके घर खाना पहुंचाने आता था। उस दिन भी वह डिलीवरी लेकर आया। लेकिन खाना देने के बाद, उसने झिझकते हुए एक गिलास पानी मांगा। जब अंकित ने उसे पानी देने के लिए अंदर बुलाया, तो उन्होंने देखा कि उसकी आंखें सूजी हुई थीं और वह रो रहा था।

पूछने पर डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि सुबह उसकी मां गिर गई थीं और उनकी हालत गंभीर है, वह ICU में हैं। उसे अपने घर जाना था, लेकिन अगली ट्रेन रात 11 बजे थी, जिससे पहुंचने में करीब 30 घंटे लगते। उसने रोते हुए कहा, 'भैया…पता नहीं मां को ज़िंदा देख भी पाऊंगा या नहीं।' अंकित को पता चला कि उसने सुबह से कुछ खाया भी नहीं है। अंकित ने जो खाना ऑर्डर किया था, उसे डिलीवरी पार्टनर के साथ बैठकर खाया। इसके बाद, उन्होंने स्काईस्कैनर पर फ्लाइट्स चेक कीं तो करीब 4,000 रुपये में एक टिकट मिल रही थी। अंकित ने बिना देर किए वह टिकट बुक कर दी।

डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि वह कभी एयरपोर्ट नहीं गया है, तो अंकित ने अपने एक दोस्त को उसकी मदद के लिए भी भेज दिया। कुछ ही घंटों में वह अपने घर पहुंच गया और अपनी मां से मिला। उसने अंकित को फोन करके बताया कि मां की हालत में सुधार है। अगले दिन सुबह, डिलीवरी पार्टनर ने अंकित को फिर फोन किया और बताया, 'भैया... मम्मी अब खतरे से बाहर हैं। डॉक्टर ने कहा 4-5 दिन में घर आ जाएंगी।' इसके साथ ही उसने टिकट के 4,000 रुपये अंकित को वापस भेज दिए। लेकिन अंकित ने तुरंत वह पैसे उसे वापस भेज दिए और कहा कि इन्हें मां के इलाज में इस्तेमाल करना। डिलीवरी पार्टनर ने भावुक होकर कहा, 'भैया... मुझे देखते ही मां में हिम्मत आ गई। अगर आपने मदद न की होती, तो मैं वक्त पर घर नहीं पहुंच पाता।'

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अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कभी-कभी किसी की ज़िंदगी बदलने के लिए करोड़ों की ज़रूरत नहीं होती, एक गिलास पानी, एक वक्त का खाना और घर की एक टिकट भी काफी होती है। दयालु बनें, आपको नहीं पता कि आप कब किसी के लिए फरिश्ता बन जाएं।' उन्होंने यह भी कहा कि पैसे का सबसे बड़ा रिटर्न यह नहीं है कि वह वापस मिल जाए, बल्कि यह अहसास है कि आप किसी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत के समय मदद कर सके।