हैदराबाद में 23 वर्षीय मेडिकल छात्रा ने आत्महत्या कर ली। परिवार वाले उसे घर में बिल्ली पालने से रोक रहे थे, जिससे वह परेशान थी। इसी विवाद के चलते उसने पंखे से लटककर अपनी जान दे दी।
हैदराबाद से एक हैरान करने वाली खबर आई है। यहां एक 23 साल की लड़की ने सिर्फ इसलिए फांसी लगा ली, क्योंकि उसके घरवाले उसे घर में बिल्ली पालने नहीं दे रहे थे। मरने वाली लड़की का नाम टी. प्रिंसी उर्फ श्रेष्ठा था और वह कुछ ही समय में डॉक्टर बनने वाली थी। यह घटना तेलंगाना के हैदराबाद के अलवाल इलाके की है। श्रेष्ठा रिसाला बाज़ार की रहने वाली थी। श्रेष्ठा को बिल्ली पालने का बहुत शौक था, लेकिन परिवार वाले इसके लिए राजी नहीं थे। इसी बात को लेकर वह इतनी परेशान हो गई कि उसने अपनी जिंदगी खत्म करने जैसा बड़ा कदम उठा लिया।
MBBS के बाद PG की तैयारी कर रही थी लड़की
श्रेष्ठा ने हाल ही में अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की थी और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की तैयारी कर रही थी। इसी बीच, बिल्ली को लेकर उसका परिवार वालों से मनमुटाव चल रहा था। इसी से तंग आकर उसने सीलिंग फैन से लटककर अपनी जान दे दी।
तीन महीने से पाल रही थी बिल्ली, घर में होता था झगड़ा
अलवाल के एसआई एन. देवेंदर के मुताबिक, श्रेष्ठा कुछ समय पहले एक बिल्ली घर ले आई थी। वह पिछले तीन महीने से इस बिल्ली को पाल रही थी। इस वजह से परिवार में अक्सर झगड़े होते थे। घरवाले कहते थे कि बिल्ली के साथ रहने से एलर्जी हो सकती है। इसी बात से परेशान होकर प्रिंसी ने शुक्रवार दोपहर को यह कदम उठाया। उस वक्त उसके परिवार वाले किसी काम से बाहर गए हुए थे। उसने अपने फ्लैट में सीलिंग फैन से फांसी लगा ली।
घरवाले बाहर गए थे, तब हुआ हादसा
जब घरवाले बाहर थे, तो उन्होंने यह पूछने के लिए फोन किया कि उसने खाना खाया या नहीं। लेकिन श्रेष्ठा ने फोन नहीं उठाया। तब उन्होंने पड़ोसियों से घर जाकर देखने को कहा। पड़ोसियों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब उन्होंने खिड़की से झांककर देखा, तो श्रेष्ठा हॉल में पंखे से लटकी हुई मिली। एसआई देवेंदर ने बताया कि इसके बाद उन्होंने पुलिस और 108 एम्बुलेंस को फोन करके जानकारी दी।
परिवार वालों ने अपनी शिकायत में बताया है कि बिल्ली पालने से मना करने पर प्रिंसी दुखी थी और शायद इसीलिए उसने खुदकुशी कर ली। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। एसआई देवेंदर ने बताया, “हमने BNSS की धारा 194 (संदिग्ध मौत) के तहत मामला दर्ज किया है। गांधी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया।”
Disclaimer: आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है। अगर आपके मन में भी सुसाइड या खुद को चोट पहुंचाने जैसे ख्याल आ रहे हैं तो आप फौरन घर-परिवार, दोस्तों और साइकेट्रिस्ट की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप इन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करके भी मदद मांग सकते हैं। आसरा (मुंबई) 022-27546669, सुमैत्री (दिल्ली) 011-23389090, रोशनी (हैदराबाद) 040-66202000, लाइफलाइन 033-64643267 (कोलकाता)। मानसिक तनाव होने पर काउंसलिंग के लिए हेल्पलाइन नंबर 14416 और 1800 8914416 पर संपर्क कर घर बैठे मदद पा सकते हैं।


