Middle East War Impact: पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। क्या भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कमी होने वाली है? सरकार ने सप्लाई, एलपीजी उत्पादन और कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट दिया है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में भारत में भी पेट्रोल, डीजल और गैस को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। कई जगहों पर अफवाहों के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें तक देखी गईं।
लेकिन सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक देश में कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य ईंधन की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और आने वाले महीनों के लिए भी आपूर्ति सुरक्षित है।
युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता में बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई स्तरों पर रणनीतिक फैसले लिए हैं।
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सरकार का दावा: दो महीने की सप्लाई सुरक्षित
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकार ने बताया कि
- देश में कम से कम दो महीने की कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है
- एलपीजी और पीएनजी की उपलब्धता भी सामान्य बनी हुई है
- सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता या उससे अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं
इसका मतलब है कि आम लोगों को फिलहाल पेट्रोल, डीजल या गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40% की बढ़ोतरी
सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत की एलपीजी सप्लाई का बड़ा हिस्सा आयात से आता है और इसका करीब 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। युद्ध के कारण इस रूट पर खतरे को देखते हुए सरकार ने पहले घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने का फैसला किया।
पहले घरेलू उपभोक्ता, फिर व्यावसायिक सप्लाई
स्थिति को देखते हुए शुरुआत में व्यावसायिक एलपीजी सप्लाई को रोक दिया गया था। बाद में धीरे-धीरे इसे बहाल किया गया। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से सप्लाई शुरू की:
- पहले 20 प्रतिशत
- फिर अतिरिक्त 10 प्रतिशत
- बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत
- और अब इसे 70 प्रतिशत तक कर दिया गया है
मंत्रालय के अनुसार 14 मार्च से अब तक लगभग 30,000 टन व्यावसायिक एलपीजी की सप्लाई की जा चुकी है।
प्रवासी मजदूरों को बांटे गए छोटे गैस सिलेंडर
सरकार ने संकट के समय कुछ खास वर्गों को प्राथमिकता देने का फैसला किया।
इसके तहत
- रेस्तरां
- ढाबे
- होटल
- औद्योगिक कैंटीन
- और प्रवासी श्रमिक को प्राथमिकता दी गई।
सरकार ने करीब 30,000 छोटे पांच किलो के गैस सिलेंडर प्रवासी मजदूरों में वितरित किए ताकि उन्हें खाना बनाने में परेशानी न हो।
पेट्रोल पंपों पर कतारें क्यों लगीं?
पिछले कुछ दिनों में देश के कुछ शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं। मंत्रालय के अनुसार इसकी वजह असली कमी नहीं बल्कि अफवाहें और घबराहट थीं। कई लोगों ने यह सोचकर ज्यादा पेट्रोल भरवा लिया कि आने वाले दिनों में सप्लाई रुक सकती है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है।
कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में राहत
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि कई पड़ोसी देशों में जहां ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, वहीं भारत में आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा बोझ नहीं डाला गया है।
क्या आगे बढ़ सकती हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा चलता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार का दावा है कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए पर्याप्त तैयारी कर ली है और देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी।
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