सीएम डॉ. मोहन यादव ने वडोदरा में महंत स्वामी महाराज की 92वीं जयंती पर दर्शन किए। 15,666 बच्चों द्वारा सत्संग दीक्षा के सामूहिक पाठ से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। उन्होंने गुजरात को सनातन, सेवा और मानव कल्याण की भूमि बताया।

वडोदरा/भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को गुजरात के वडोदरा में पूज्य महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्म वर्षगांठ के अवसर पर उनके दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को उन्होंने संबोधित भी किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सत्संग दीक्षा पाठ से बना नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्मजयंती के अवसर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। कार्यक्रम में 15,666 बच्चों ने एक साथ स्वामी जी द्वारा रचित ‘सत्संग दीक्षा’ ग्रंथ के 315 श्लोकों का सामूहिक पाठ किया। इस अद्भुत आयोजन ने नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया है।

मध्यप्रदेश से जुड़ी हैं महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि पूज्य महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें मध्यप्रदेश से भी जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात की धरती न केवल भारत में बल्कि विश्व के अनेक देशों में धर्म, आध्यात्म, सनातन परंपरा, मानव कल्याण और सेवा के मूल्यों को जाग्रत करने का कार्य कर रही है।

गुजरात की धरती से निकली महान विभूतियों की परंपरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी पवित्र भूमि से महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसी महान विभूतियों ने देश को दिशा दी। आज उसी परंपरा को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह आगे बढ़ा रहे हैं।

विश्वभर में स्वामीनारायण परंपरा का विस्तार

डॉ. यादव ने कहा कि सऊदी अरब, अबूधाबी और अमेरिका जैसे देशों में स्वामीनारायण अक्षरधाम के पारंपरिक हिंदू मंदिरों का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही दुनिया भर में 600 से अधिक मंदिरों का निर्माण सनातन संस्कृति के वैश्विक विस्तार का प्रतीक है। सत्संग दीक्षा जैसे शास्त्रसम्मत ग्रंथ और हजारों सेवाभावी युवा संत सनातन परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं।

वडोदरा: भक्ति और सेवा की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वडोदरा केवल एक शहर नहीं, बल्कि भक्ति और सेवा की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। इस भूमि से गुरु परंपरा का वह संदेश फैल रहा है, जो भगवान स्वामीनारायण से लेकर पूज्य महंत स्वामी महाराज के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

संतों की शिक्षाएं बच्चों को करती हैं आलोकित

मुख्यमंत्री ने संतों की महत्ता बताते हुए कहा कि संत वृंद ईश्वर के स्वरूप होते हैं। उनकी सामूहिक उपस्थिति बगिया में एक साथ खिले अनेक पुष्पों की तरह होती है। संतों की शिक्षाएं बच्चों को आलोकित करती हैं और ये बच्चे भविष्य में भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाएंगे। उन्होंने दीक्षा ग्रहण करने वाले सभी बच्चों को वंदन और अभिनंदन के योग्य बताया।