ट्विशा शर्मा दहेज हत्या केस में बड़ा रहस्य! MP सरकार ने अचानक CBI जांच की सिफारिश की और हाई कोर्ट में परिवार का समर्थन तय किया। सुनवाई से पहले उठे इस कदम ने केस को और रहस्यमयी बना दिया है। अब साजिश, दबाव और नए खुलासों की आशंका तेज।

भोपाल/जबलपुर: राजधानी भोपाल में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की रहस्यमयी मौत के मामले में शुक्रवार को एक ऐसा ऐतिहासिक और हैरान कर देने वाला मोड़ आया, जिसने आरोपी पक्ष के रसूखदारों की नींद उड़ गई है। जनता के बढ़ते आक्रोश और इंसाफ की चौतरफा मांग के बीच, मध्य प्रदेश की डा. मोहन यादव सरकार ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इस पूरे 'दहेज हत्या' मामले की कमान अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी यानी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) के हाथों में सौंपने की आधिकारिक सिफारिश कर दी है। इस फैसले के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी और कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

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हाई कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले 'मास्टरस्ट्रोक': परिवार के साथ खड़ी हुई सरकार!

यह पूरा घटनाक्रम आज जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में होने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई से ठीक पहले सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने अदालत के भीतर पीड़ित परिवार का पूरी ताकत से समर्थन करने का मन बना लिया है। कोर्ट रूम के भीतर सस्पेंस तब और बढ़ गया जब यह साफ हुआ कि खुद मध्य प्रदेश के एडवोकेट जनरल राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए सीधे अदालत के सामने पेश होंगे। इतना ही नहीं, इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल के जरिए केंद्र सरकार भी अदालत में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।

MP राज्यपाल के नाम पर विशेष आदेश: गृह विभाग की वो 'गोपनीय' अधिसूचना!

मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने इस संबंध में एक बेहद कड़ा आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 (Delhi Special Police Establishment Act) की धारा 6 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, राज्य सरकार ने राज्यपाल के नाम पर पूरे प्रदेश में सीबीआई (CBI) के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। गृह विभाग की सचिव कृष्णवेणी देशावतु द्वारा हस्ताक्षरित यह आदेश साफ करता है कि सीबीआई केवल मौत की जांच नहीं करेगी, बल्कि इसके पीछे छिपी गहरी आपराधिक साजिश, दहेज के लिए प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment) के हर एक पहलू को पूरी तरह खंगालेगी।

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फाइलों के तत्काल ट्रांसफर का अल्टीमेटम: रसूखदारों के चक्रव्यूह को भेदने की तैयारी

इस आदेश की कॉपियां तत्काल प्रभाव से कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के संयुक्त सचिव, केंद्रीय गृह सचिव, नई दिल्ली स्थित CBI निदेशक और मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) समेत तमाम आला अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। दरअसल, ट्विशा के ससुराल पक्ष पर यह आरोप लग रहे थे कि पूर्व-जज सास और नामी वकील पति अपने ऊंचे संपर्कों और रसूख का इस्तेमाल करके स्थानीय पुलिस की जांच को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन अब केस डायरी सीधे केंद्रीय एजेंसी के पास जाने से आरोपियों के बचने के सारे रास्ते बंद होते दिखाई दे रहे हैं।

बंद कमरों के खौफनाक राज... क्या अब बाहर आएगा सच?

नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के समर्थ सिंह से हुई थी, जिसके महज 5 महीने बाद 12 मई को उनकी लाश भोपाल स्थित ससुराल में मिली थी। तब से लेकर अब तक गायब नायलॉन की रस्सी, मौत के तुरंत बाद की गई 46 रहस्यमयी कॉल और जबरन गर्भपात (MTP) कराने के दबाव जैसे कई अनसुलझे सवालों ने इस केस को देश का सबसे बड़ा सस्पेंस बना दिया है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली से आने वाले सीबीआई के दिग्गज अधिकारी जब भोपाल के उस 'पॉश बंगले' में दाखिल होंगे, तो बंद कमरों के भीतर दफन कौन सा खौफनाक सच दुनिया के सामने आएगा।