Mumbai Tenant Rejected Due to Numerology Viral Video: मुंबई में एक युवती को न्यूमरोलॉजी नंबर की वजह से किराए का घर नहीं मिला। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ी गई है। जानें पूरा मामला।
Instagarm Viral Video: मुंबई में किराएदार चुनने का अनोखा तरीका बना चर्चा का विषय बना हुआ है। जी हां अब मुंबई में घर किराए पर लेना पहले से ही आसान काम नहीं माना जाता। कभी खाने-पीने की आदतों को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी वैवाहिक स्थिति के आधार पर लोगों को घर देने से मना कर दिया जाता है। लेकिन अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। कंटेंट क्रिएटर वाग्मिता सिंह ने एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि उनकी दोस्त को फ्लैट किराए पर लेने से सिर्फ इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उसका न्यूमरोलॉजी नंबर मकान मालिक के घर के नंबर से मेल नहीं खाता था। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

फ्लैट देखने पहुंचीं, लेकिन बातचीत पहुंच गई न्यूमरोलॉजी तक
वाग्मिता सिंह के मुताबिक, वह अपनी एक दोस्त के साथ एक फ्लैट देखने गई थीं। बातचीत के दौरान मकान मालकिन ने संभावित किराएदार से उसका नंबर पूछा। शुरुआत में दोनों को लगा कि शायद फोन नंबर मांगा जा रहा है, लेकिन मामला कुछ और निकला। वीडियो में वाग्मिता सिंह बताती हैं कि मकान मालकिन ने स्पष्ट किया कि वह फोन नंबर नहीं बल्कि न्यूमरोलॉजी नंबर जानना चाहती हैं। इसके बाद उन्होंने दोनों को यह भी समझाया कि न्यूमरोलॉजी नंबर कैसे निकाला जाता है। जब उनकी दोस्त का नंबर 7 निकला, तब मकान मालकिन ने कहा कि उनके घर का नंबर 4 है और दोनों नंबरों का मेल सही नहीं बैठता। इसी आधार पर दोस्त को किराएदार के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया। नीचे देखें वायरल वीडियो-
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन
वीडियो सामने आने के बाद कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इसे मुंबई के रेंटल मार्केट की एक और अनोखी कहानी बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने अपने निजी अनुभव भी शेयर किए। एक यूजर ने लिखा कि उन्हें भी एक ऐसी मकान मालकिन मिली थीं जो केवल एक तय शुभ समय पर ही किराएदार से मिलती थीं। वहीं कई लोगों ने न्यूमरोलॉजी को लेकर अलग-अलग दावे किए। कुछ का कहना था कि 4 और 7 का संयोजन अच्छा माना जाता है, जबकि दूसरे इससे बिल्कुल असहमत नजर आए।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या किराएदार चुनने के लिए व्यक्तिगत मान्यताओं और ज्योतिषीय या न्यूमरोलॉजी आधारित मानकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा हिस्सा इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूमता दिखाई दिया। दिलचस्प बात यह रही कि कमेंट्स पढ़ने के बाद कई यूजर्स इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि न्यूमरोलॉजी को लेकर लोगों की राय खुद एक-दूसरे से मेल नहीं खाती। ऐसे में यह वीडियो सिर्फ एक किराएदार की कहानी नहीं, बल्कि महानगरों में बदलती प्राथमिकताओं और मकान मालिकों की चयन प्रक्रिया पर भी नई चर्चा शुरू कर रहा है।


