Mumbai Metro ने स्टेशनों पर टचलेस स्पिट बिन लगाए और इसे ‘दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान’ कहा. Zoru Bhathena की 27 September, 2026 की पोस्ट के बाद 28 September, 2026 को बहस तेज हुई. कुछ ने इसे व्यावहारिक माना, तो कई ने थूकने को बढ़ावा देने वाला कदम बताया.

Mumbai Metro Spit Bin: मुंबई में सार्वजनिक स्वच्छता और नागरिक शिष्टाचार को लेकर बहस के बीच Mumbai Metro से जुड़ी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। तस्वीर में एक स्टेशन पर ‘टचलेस स्पिट बिन’ यानी बिना छुए इस्तेमाल होने वाला थूकने का यूनिट नजर आ रहा है। साइनबोर्ड पर इसे ‘दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान’ बताया गया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

क्या है ‘टचलेस स्पिट बिन’?

वायरल तस्वीरों के मुताबिक, इस यूनिट का उद्देश्य सार्वजनिक जगहों पर खुले में थूकने की समस्या को नियंत्रित करना है। स्टेशन पर लगाए गए साइनबोर्ड पर यात्रियों से जिम्मेदार व्यवहार करने की अपील की गई है। यूनिट को बिना छुए इस्तेमाल करने के निर्देश मराठी और अंग्रेजी में दिए गए हैं। तस्वीरों में एक अलग ‘स्पिट बॉक्स’ भी दिखाई देता है। साइनबोर्ड पर MMRDA और Maha Mumbai Metro के लोगो नजर आते हैं। इसी बोर्ड पर इसे ‘दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान’ बताया गया है, जो सोशल मीडिया पर बहस का प्रमुख कारण बना हुआ है।

27 सितंबर को शेयर हुई तस्वीर

X पर यूजर Zoru Bhathena ने 27 सितंबर 2026 को तस्वीर शेयर की और मुंबई मेट्रो में समर्पित थूकने वाले स्थान को लेकर टिप्पणी की। इसके बाद पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। 28 सितंबर तक इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई।

किसी ने बताया व्यावहारिक कदम, तो किसी ने जताई आपत्ति

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सार्वजनिक जगहों पर गंदगी कम करने के लिए व्यावहारिक पहल बताया। वहीं, कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि थूकने के लिए अलग जगह उपलब्ध कराने से क्या खुले में थूकने की आदत कम होगी या इसे बढ़ावा मिलेगा।

एक यूजर ने आशंका जताई कि भविष्य में लोग निर्धारित यूनिट के आसपास भी थूक सकते हैं। वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में इसे सार्वजनिक स्वच्छता की समस्या से निपटने का अलग तरीका बताया गया।

‘थूकने पर रोक होनी चाहिए’ वाली प्रतिक्रियाएं भी आईं

कई यूजर्स ने इस पहल पर कड़ी आपत्ति जताई। कुछ लोगों का तर्क था कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की आदत को रोकने और स्वच्छता के नियमों को लागू करने पर ज्यादा जोर होना चाहिए।

एक सोशल मीडिया प्रतिक्रिया में दावा किया गया कि कई देशों की यात्रा के बावजूद वहां सार्वजनिक तौर पर लोगों को थूकते हुए नहीं देखा गया। वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि स्वच्छता अभियानों के बजाय थूकने के लिए अलग सुविधा क्यों बनाई जा रही है।

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तस्वीर और दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

वायरल तस्वीर के आधार पर इस पहल को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। खास तौर पर ‘दुनिया का पहला तय थूकने का स्थान’ वाला दावा चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर इस दावे और यूनिट की पूरी पृष्ठभूमि की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है।

ऐसे में इस मामले को फिलहाल वायरल तस्वीर और सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर यह मामला नागरिक व्यवहार, नियमों और सुविधाओं के बीच संतुलन पर नई बहस जरूर छेड़ रहा है।