मुंबई के मुहर्रम जुलूस में कथित तौर पर ज़िंक फॉस्फाइड वाले कैप्सूल बांटने वाला आरोपी गिरफ्तार। 11 लोग बीमार हुए, सभी सुरक्षित; पुलिस साजिश और संभावित कनेक्शन की जांच कर रही है।
Mumbai Muharram Procession: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे सुरक्षा तंत्र और आम जनता को हिलाकर रख दिया है। मुंबई के भायखला इलाके में मुहर्रम (आशूरा) के पवित्र जुलूस के दौरान एक ऐसा नरसंहार होने वाला था, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। पुलिस ने समय रहते एक बेहद शातिर शख्स को गिरफ्तार किया है, जो दर्द निवारक और इम्यूनिटी बूस्टर (रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा) के नाम पर मासूम लोगों के बीच मौत बांट रहा था। पकड़े गए आरोपी की पहचान फैयाज़ प्रेमजी के रूप में हुई है, जिसने बाद में पुलिस के सामने जो कबूलनामा किया, उसने सभी के होश उड़ा दिए।

दर्द निवारक के नाम पर 'मौत का कैप्सूल': रे रोड पर मची खलबली
यह खौफनाक घटना शुक्रवार को रे रोड पर रहमतबाद कब्रिस्तान के पास चल रहे मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुई। भारी भीड़ का फायदा उठाते हुए आरोपी फैयाज़ प्रेमजी लोगों के पास जा-जाकर उन्हें मुफ्त में कैप्सूल बांट रहा था। उसने लोगों को झांसा दिया कि ये कैप्सूल शरीर का दर्द दूर करेंगे और उनकी इम्यूनिटी को बढ़ाएंगे। मासूम लोग उसकी बातों में आ गए और गोलियां खाने लगे। लेकिन कुछ ही देर में वहां हड़कंप मच गया, जब इन गोलियों को खाने वाले लगभग एक दर्जन लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सलमान सैयद नाम के एक पीड़ित ने बताया कि गोली निगलते ही उसके पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया और वह लगातार उल्टियां करने लगा। आनन-फानन में बीमार पड़े 11 लोगों को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की भारी मशक्कत के बाद अब वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
तीन महिला वॉलंटियर्स का सूझबूझ: ऐसे टला मुंबई का सबसे बड़ा नरसंहार
इस महासंकट के बीच तीन महिला वॉलंटियर्स फरिश्ता बनकर सामने आईं, जिनकी सतर्कता ने हज़ारों लोगों को साक्षात मौत के मुंह में जाने से बचा लिया। जुलूस की व्यवस्था संभाल रही इन वॉलंटियर्स में से एक की नज़र फैयाज़ प्रेमजी पर पड़ी, जो बेहद अजीब और संदिग्ध तरीके से लोगों को गोलियां थमा रहा था। जब महिलाओं ने उसे रोककर पूछताछ की, तो उसने दावा किया कि ये सामान्य दवाएं हैं। हालांकि, महिलाओं को उसकी बातों पर यकीन नहीं हुआ। उन्होंने तुरंत एक कैप्सूल को खोलकर देखा, तो उसके अंदर एक रहस्यमयी पाउडर भरा हुआ था। शक गहराते ही उन्होंने बिना वक्त गंवाए पुलिस को सूचित किया। इसके साथ ही माहौल की गंभीरता को देखते हुए तुरंत लाउडस्पीकर से बड़े पैमाने पर अनाउंसमेंट (घोषणा) की गई कि कोई भी व्यक्ति रास्ते में बांटी गई गोलियों को न खाए। इस त्वरित कार्रवाई ने हज़ारों लोगों को वह ज़हर खाने से रोक दिया।
"15,000 लोगों को मारना चाहता था": BBA ग्रेजुएट का रोंगटे खड़ा करने वाला कबूलनामा
घटना की सूचना मिलते ही बायकुला पुलिस स्टेशन की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रेमजी को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जब उसके कैप्सूल के स्टॉक पर छापा मारा, तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। पुलिस ने मौके से कम से कम 14,900 तैयार ज़हरीले कैप्सूल ज़ब्त किए। शुरुआती जांच में डीसीपी (DCP) जयंत मीणा ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी ने 30,000 खाली कैप्सूल और 50 किलो घातक केमिकल का ऑर्डर भी दे रखा था। पुलिस कस्टडी मिलने के बाद जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने ठंडे दिमाग से कहा, "मैं उस दिन कम से कम 15,000 लोगों की जान लेना चाहता था।" पुलिस यह जानकर हैरान है कि इतनी बड़ी साज़िश को अंजाम देने वाला आरोपी फैयाज़ प्रेमजी एक पढ़ा-लिखा BBA ग्रेजुएट है। जांच में उसके पासपोर्ट रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि वह पहले ईरान और इराक जैसी विदेशी यात्राएं भी कर चुका है।
कितना जानलेवा है 'जिंक फॉस्फाइड'? जिसका कोई एंटीडोट नहीं है
डीसीपी जयंत मीणा ने पुष्टि की है कि फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए इन कैप्सूलों में 'जिंक फॉस्फाइड' (Zinc Phosphide) मिलाया गया था। यह वही जानलेवा केमिकल कंपाउंड है, जिसका इस्तेमाल चूहों को मारने वाली दवाओं और कीटनाशकों में किया जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जिंक फॉस्फाइड इंसानी शरीर के लिए एक पूर्ण काल है। अगर कोई इसे खा ले, तो यह पेट में मौजूद एसिड के साथ प्रतिक्रिया करके 'फॉसीफिन गैस' बनाता है। यह अत्यधिक ज़हरीली गैस सीधे इंसान के दिल, फेफड़ों, लिवर, किडनी और दिमाग को तुरंत डैमेज (नष्ट) कर देती है। सबसे डरावनी बात यह है कि इस ज़हर का दुनिया में कोई विशिष्ट एंटीडोट (काट या इलाज) उपलब्ध नहीं है। इसे खा लेने पर सिर्फ वेंटिलेटर सपोर्ट और लक्षणों के आधार पर ही किसी तरह जान बचाने की कोशिश की जा सकती है। फिलहाल कोर्ट ने आरोपी को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है, और पुलिस इसके किसी संभावित आतंकी कनेक्शन या पर्दे के पीछे छिपे मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है।
कबूलनामे ने बढ़ाई चिंता, लेकिन जांच अभी जारी
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर दावा किया कि वह बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाना चाहता था। हालांकि, पुलिस अभी इस कथित बयान की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसके पीछे कोई संगठित साजिश या अन्य सहयोगी भी शामिल थे। फिलहाल आरोपी को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। शुरुआती सतर्कता और त्वरित पुलिस कार्रवाई ने इस घटना को बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान में बदलने से रोक दिया।


