Mumbai Water Cut: मुंबई में 10% पानी की कटौती के बीच BMC सड़कों की धुलाई पर 8.25 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। पानी की व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
मुंबई में पानी बचाने की चिंता के बीच अब बीएमसी का एक फैसला बहस का कारण बन गया है। महाराष्ट्र के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति और मुंबई में 10 फीसदी पानी की कटौती के बीच नगर निगम शहर की सड़कों को रोजाना धोने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए करीब 8.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सवाल उठ रहा है कि जब घरों तक पानी सीमित पहुंच रहा है, तब सड़कों की धुलाई के लिए इतना पानी कहां से आएगा?
8 करोड़ से ज्यादा का सड़क धुलाई प्लान
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सार्वजनिक सड़कों पर धूल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए टैंकरों से सड़कें धोने की योजना बनाई है। इसके तहत बारिश वाले दिनों को छोड़कर करीब 150 दिन, यानी लगभग पांच महीने तक यह अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए 8 करोड़ 25 लाख 33 हजार 48 रुपये का ठेका प्रस्तावित है।
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सात जोन में रोज होगी धुलाई
योजना मुंबई के सातों जोन में लागू की जानी है। सड़कों की सफाई के लिए जेटिंग सिस्टम वाले टैंकर इस्तेमाल होंगे। इनमें 2,000, 5,000 और 10,000 लीटर क्षमता वाले टैंकर शामिल होंगे। मकसद सड़कों पर जमा धूल को पानी की तेज धार से हटाकर प्रदूषण को नियंत्रित करना है।
पानी की कटौती के बीच उठे बड़े सवाल
बीएमसी के इस प्रस्ताव पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र के करीब 75 फीसदी हिस्से में सूखे की स्थिति और मुंबई में 10 फीसदी पानी की कटौती के बीच रोजाना सड़कों की धुलाई के लिए पानी खर्च करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस अभियान के लिए पानी का स्रोत क्या होगा और इसकी व्यवस्था कैसे की जाएगी?
स्टैंडिंग कमेटी में आएगा प्रस्ताव
सड़क धुलाई से जुड़ा प्रस्ताव बुधवार को बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी के सामने रखा जाना है। इससे पहले ही समिति के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन से पानी की उपलब्धता और व्यवस्था स्पष्ट करने को कहा है। उनका कहना है कि पहले पानी की योजना स्पष्ट होनी चाहिए, उसके बाद ऐसे प्रस्ताव पर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रदूषण रोकना जरूरी, लेकिन पानी कितना?
सड़कों की धुलाई से धूल नियंत्रण में मदद मिल सकती है, लेकिन पानी की कमी के दौर में संसाधनों के इस्तेमाल का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बीएमसी के सामने अब चुनौती दो जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की है—एक तरफ मुंबई की हवा में धूल और प्रदूषण कम करना और दूसरी तरफ सीमित जल संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल। करोड़ों रुपये के इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होने से पहले पानी की व्यवस्था स्पष्ट होना अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
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