देश की विधायी संस्थाओं के कामकाज का होगा मूल्यांकन। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स बनाने की घोषणा की। तकनीक, एआई, डिजिटल संसद और विधायकों की क्षमता बढ़ाने पर लिए गए अहम फैसले।

लखनऊ। लोकतंत्र की रीढ़ मानी जाने वाली विधायी संस्थाओं को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। अब देश के सभी विधायी निकायों के कामकाज का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स तैयार किया जाएगा, जिससे विधानसभाओं और संसद के प्रदर्शन का तुलनात्मक आकलन संभव हो सकेगा।

यह जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन के बाद मीडिया से बातचीत में दी।

तीन दिन की चर्चा, भविष्य की दिशा तय

19 जनवरी से शुरू हुए इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों से आए 36 पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। तीन दिनों तक चली बैठकों में विधायी संस्थाओं के सामने मौजूद चुनौतियों और उनके समाधान पर गंभीर मंथन हुआ। इस दौरान तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई-

  • तकनीक के जरिए विधायी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना
  • सदस्यों की क्षमता बढ़ाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना
  • जनता के प्रति जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना

इन चर्चाओं के आधार पर कुल छह अहम संकल्प लिए गए।

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2047 के लक्ष्य के साथ विधानसभाओं की भूमिका तय

सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सभी विधानसभाएं सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इसके लिए न सिर्फ राज्यों, बल्कि राष्ट्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी सदनों में नियमित चर्चा की जाएगी।

कम से कम 30 दिन बैठें विधानमंडल

लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए यह तय किया गया कि राज्यों की विधानसभाएं साल में न्यूनतम 30 दिन जरूर बैठें। इससे विधायी कामकाज में गंभीरता आएगी और जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी चर्चा संभव होगी।

तकनीक और एआई का बढ़ेगा दायरा

विधानसभाओं और संसद में कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया। हालांकि, इसके साथ यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई का प्रयोग पूरी जिम्मेदारी, नैतिकता और पारदर्शिता के साथ किया जाएगा, ताकि भरोसे पर कोई सवाल न उठे।

विधायकों की कैपेसिटी बिल्डिंग पर फोकस

सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि विधायकों की क्षमता बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाए। सभी विधानमंडलों में रिसर्च विंग को मजबूत किया जाएगा, पुरानी बहसों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जाएगा और लाइब्रेरी को आधुनिक बनाया जाएगा, ताकि तथ्यपरक और सार्थक चर्चाओं को बढ़ावा मिले।

नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स से होगी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

सबसे अहम निर्णय के तौर पर नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स बनाने पर सहमति बनी। इसके तहत गठित कमेटी कुछ तय मानक बनाएगी, जिनके आधार पर विधायी संस्थाओं के कामकाज का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और संस्थागत सुधार तेज होंगे।

पेपरलेस विधानसभाओं से डिजिटल संसद की ओर

ओम बिरला ने बताया कि वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश में हुए इसी सम्मेलन में पेपरलेस विधानसभाओं का संकल्प लिया गया था, जो अब पूरी तरह साकार हो चुका है। आज देश की सभी विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं, कार्यवाही का लाइव प्रसारण हो रहा है और रिसर्च विंग सक्रिय हैं। आने वाले समय में सभी विधानसभाएं डिजिटल संसद प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगी।

बजट सत्र का भी दिया अपडेट

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होगा। 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा, जबकि 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट प्रस्तुत करेंगी। यह सत्र 13 फरवरी तक चलेगा, इसके बाद अगला सत्र 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित होगा।

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