Bank Strike :28 से 30 सितंबर तक होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल के कारण ग्राहकों की सुविधा के लिए रविवार को भी बैंक खुले रहे। बैंक यूनियनों की दो सबसे बड़ी मांगे हैं।

सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) [भारत], 27 सितंबर (ANI): देश भर में 28 से 30 सितंबर तक बैंकों की तीन दिन की बड़ी हड़ताल होने वाली है। ग्राहकों को परेशानी न हो, इसलिए रविवार को भी बैंक खुले रखे गए। बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन (पश्चिम बंगाल) के उपाध्यक्ष श्यामल कुमार हाजरा ने इसे इतिहास में पहली बार होने वाली घटना बताया है। रविवार को बैंक खोलने का सीधा मकसद यही था कि लोग हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी काम निपटा लें।

देश के इतिहास में पहली बार रविवार को खुले बैंक

मीडिया से बात करते हुए श्यामल कुमार हाजरा ने कहा कि ऐसा भारत के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है। उन्होंने ANI को बताया, "आज रविवार है और शायद देश के इतिहास में पहली बार ग्राहकों की सुविधा के लिए रविवार को भी बैंक खुले हैं। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी छुट्टी छोड़कर काम किया है। हमने ग्राहकों से भी अपील की थी कि वे तीन दिन की बंदी से पहले आज ही अपने जरूरी काम पूरे कर लें।"

हड़ताल से पहले बैंकों ने किए खास इंतजाम

  • आम जनता को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए यह खास इंतजाम किया गया था। हाजरा ने बताया कि सभी बैंकों ने अपने ग्राहकों को मैसेज भेजकर इस बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी, ताकि वे समय रहते अपना काम निपटा सकें।
  • आपको बता दें कि 28 से 30 सितंबर तक बैंक कर्मचारी और अधिकारी देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने इस हड़ताल का ऐलान किया है। इनकी मुख्य मांगें हैं- हफ्ते में 5 दिन काम (शनिवार-रविवार छुट्टी) और नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लेना।
  • शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, UFBU हिमाचल प्रदेश के संयोजक और बैंकर्स यूनाइटेड फोरम ऑफ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार ने ढाई साल पहले जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए। इसी वजह से यूनियन को मजबूरी में हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा।

बैंक कर्मियों की ये हैं दो सबसे बड़ी मांगे?

  • शर्मा ने कहा, "हमारी सबसे बड़ी मांग 5 दिन का वर्किंग वीक है, जिसमें शनिवार और रविवार को छुट्टी मिले। दूसरा बड़ा मुद्दा नई पीएलआई (PLI) स्कीम को वापस लेना है, जिसे वित्तीय सेवा विभाग ने एकतरफा लागू कर दिया है। समझौते को ढाई साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन वादे अभी तक अधूरे हैं। इसलिए हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।"
  • उन्होंने आगे बताया कि इन मुद्दों के न सुलझने से बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों में काफी नाराजगी है। यूनियन चाहती है कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द से जल्द बातचीत शुरू करें और पुराने समझौते को लागू करें।

28 से 30 सितंबर तक बंद रहेंगे बैंक

  • शर्मा ने साफ किया, "हम ग्राहकों को परेशान नहीं करना चाहते। हम जानते हैं कि बैंकिंग सेवाएं कितनी जरूरी हैं और हड़ताल से लोगों को कितनी दिक्कत होती है। लेकिन जब हमारी जायज मांगें इतने लंबे समय तक अनसुनी रह जाती हैं, तो सरकार का ध्यान खींचने के लिए हमें यह कदम उठाना ही पड़ता है।"
  • उन्होंने सरकार से अपील की कि वह बातचीत के जरिए इन मसलों को सुलझाए। शर्मा ने कहा, "हम सरकार और अधिकारियों से अपील करते हैं कि वे तुरंत सार्थक चर्चा के लिए आगे आएं। हम आम जनता और बैंक ग्राहकों से भी गुजारिश करते हैं कि वे हमारी स्थिति को समझें और 28 से 30 सितंबर तक चलने वाली इस हड़ताल में हमारा साथ दें।"
  • इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में UFBU से जुड़े कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इनमें AIBOC से आशुतोष शर्मा और खेम राज वर्मा, SBI ऑफिसर्स एसोसिएशन से दीपक और दिनेश शर्मा, AIPNBOA से सिद्धार्थ टारगेट, यूको बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन से पीयूष राठौर, केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन से मनीष माचा, SBI स्टाफ एसोसिएशन से अंकुश मेहता, AIBEA से अक्कूर रोहल और नीतीश शर्मा, BEFI से राजिंदर कुमार और UBI ऑफिसर्स एसोसिएशन से मिथुन वर्मा शामिल रहे।

28 से 30 सितंबर तक होने वाली इस तीन दिन की हड़ताल से देशभर में बैंकिंग कामकाज पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसीलिए लिया गया था ताकि हड़ताल शुरू होने से पहले लोग अपने जरूरी काम निपटा सकें।