NEET पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाली एक छात्रा की मां ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को नाकाफी बताया है। उन्होंने दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

NEET परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत के बाद उसकी मां ने पेपर लीक मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी बेटी अब कभी वापस नहीं आ सकती, लेकिन दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई और परिवार इस तरह का दर्द झेलने को मजबूर न हो। दिवंगत स्टूडेंट की मां ने कहा, सिर्फ इस्तीफा देने से हमें न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि पूरे मामले के जिम्मेदार लोगों को फांसी जैसी कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मां ने उठाए सवाल

NEET पेपर लीक को लेकर लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद छात्रा की मां नीलम चतुर्वेदी ने सवाल उठाया कि केवल इस्तीफा देने से क्या बदलेगा। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती हैं, लेकिन सिर्फ मंत्री का इस्तीफा इसके लिए पर्याप्त नहीं है। नीलम चतुर्वेदी ने कहा, "हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से संतुष्ट नहीं हैं। हमने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है। पेपर लीक में शामिल लोगों को सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"

NEET परीक्षा रद्द होने के बाद गहरे सदमे में चली गई थी छात्रा

नीलम चतुर्वेदी की बेटी आकांक्षा चतुर्वेदी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने 3 मई को परीक्षा दी थी और परिवार को बताया था कि उनका पेपर बहुत अच्छा गया है। लेकिन परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद वह गहरे सदमे में चली गईं। इसके कुछ समय बाद, 20 मई को नागपुर में उन्होंने सुसाइड कर लिया था। बाद में एक महीने बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की गई थी।

बेटी का सपना पूरा करने परिवार ने उठाया था एक बड़ा कदम

आकांक्षा का परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश का रहने वाला था। बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने के लिए पूरा परिवार नागपुर आकर बस गया था। आकांक्षा ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया था। परिवार को पूरा भरोसा था कि वह अच्छे अंकों के साथ परीक्षा पास कर लेगी।

'अगर मेरी बेटी होती तो सब संभाल लेती'

आकांक्षा की मां ने परिवार की स्थिति बताते हुए कहा कि उनकी बेटी के जाने के बाद पूरा परिवार टूट चुका है। उन्होंने कहा, आकांक्षा के पिता को दो बार हार्ट अटैक आ चुका है और उन्हें लकवा भी मार चुका है। अब हमारी देखभाल कौन करेगा? अगर मेरी बेटी आज जिंदा होती तो वह सब कुछ संभाल लेती।

सुसाइड नोट में बयां किया था दर्द

18 वर्षीय आकांक्षा ने अपने हाथ से लिखे नोट में उस मानसिक दबाव और निराशा का जिक्र किया था, जिससे वह गुजर रही थीं। नोट में उन्होंने लिखा था, "मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि आपकी बेटी मेहनत करके डॉक्टर बनेगी। लेकिन अब मुझमें दोबारा NEET परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है। पहले प्रयास में मेरे अच्छे नंबर आने की उम्मीद थी, लेकिन अब मुझे भरोसा नहीं है कि मैं दोबारा वैसा प्रदर्शन कर पाऊंगी। मुझे माफ कर देना।"

परिवार ने बेटी की पढ़ाई के लिए किए थे बड़े संघर्ष

आकांक्षा चतुर्वेदी की फैमिली के मुताबिक, पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। वह खेती करते थे और परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ नागपुर में रसोइए का काम भी करते थे, ताकि बेटी की कोचिंग और पढ़ाई का खर्च उठा सकें। NEET की परीक्षा देकर लौटने के बाद आकांक्षा काफी खुश थी। उसे पूरा विश्वास था कि उसके 650 से ज्यादा अंक आएंगे। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद वो पूरी तरह टूट गई। उसने खाना-पीना कम कर दिया, लोगों से बातचीत करना लगभग छोड़ दिया और गहरे मानसिक तनाव में रहने लगी।

'हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा हो जाएगा'

परिवार का कहना है कि उन्हें कभी यह अंदाजा नहीं था कि हालात इस मोड़ तक पहुंच जाएंगे। उनके अनुसार, आकांक्षा डॉक्टर बनकर अपने परिवार का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन पेपरलीक और उसके बाद बेटी को खोने के कम ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। अब आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी ने रोते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी तो वापस नहीं मिल सकती, लेकिन वो चाहती हैं कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में किसी और छात्र या परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।