NEET-UG री-एग्जाम से पहले केंद्र ने Meta, Google और Telegram के साथ मिलकर फर्जी पेपर लीक गैंग, संदिग्ध Telegram चैनलों और वायरल बॉट नेटवर्क पर बड़ा डिजिटल शिकंजा कस दिया है। खुफिया एजेंसियों को डर है कि संगठित दुष्प्रचार छात्रों में फिर से अफरा-तफरी और परीक्षा पर अविश्वास फैला सकता है।

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की दोबारा होने वाली परीक्षा से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। हाल ही में हुए पेपर लीक विवाद से सबक लेते हुए, परीक्षा में देश का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए सरकार ने इंटरनेट जगत के बेताज बादशाहों-Meta, Google और Telegram-के साथ हाथ मिला लिया है। बुधवार को हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद साफ हो गया है कि इस बार न केवल परीक्षा केंद्रों पर, बल्कि सोशल मीडिया के छिपे हुए कोनों पर भी सरकार की तीसरी आंख का कड़ा पहरा होगा।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

टेलीग्राम बॉट्स और गुमनाम ग्रुप्स: खुफिया एजेंसियों का बड़ा खुलासा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की। जांच में सामने आया है कि बड़ी परीक्षाओं से ठीक पहले कुछ संगठित दुष्प्रचार नेटवर्क और ऑटोमेटेड बॉट्स (Automated Bots) अचानक सक्रिय हो जाते हैं। ये नेटवर्क टेलीग्राम चैनलों और गुमनाम ग्रुप्स के जरिए पेपर लीक के मनगढ़ंत दावे, क्लिकबेट मैसेज और फर्जी प्रश्नपत्र फैलाकर छात्रों और अभिभावकों के बीच जानबूझकर घबराहट पैदा करते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में पाया गया है कि ये संदेहास्पद चैनल कुछ सीमित फोन नंबरों से ही संचालित हो रहे हैं, जो किसी बड़े और संगठित डिजिटल सिंडिकेट की ओर इशारा करते हैं।

Scroll to load tweet…

टेक दिग्गजों का आश्वासन: 'सर्च' से लेकर 'चैट' तक तुरंत ब्लॉक होगी फर्जी जानकारी

सरकार के कड़े रुख को देखते हुए Meta, Google और Telegram जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस डिजिटल सफाई अभियान में सक्रिय सहयोग देने का भरोसा दिया है। शिक्षा मंत्री ने कंपनियों को दोटूक निर्देश दिए हैं कि वे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ रियल-टाइम में तालमेल बिठाएं। जैसे ही किसी प्लेटफॉर्म पर "अंदर की जानकारी" या "लीक पेपर" का फर्जी दावा करने वाला कोई लिंक या मैसेज दिखेगा, उसे तुरंत ट्रैक करके डिलीट कर दिया जाएगा। विशेष रूप से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि कोई भी ग्रुप रातारात छात्रों को ठगने के लिए न बन सके।

'जीरो टॉलरेंस' मोड में सरकार: जमीन से लेकर आसमान तक कड़ा पहरा

सुरक्षा का नया चक्रव्यूह: पिछली परीक्षा प्रक्रिया में पहचानी गई सभी कमियों को पूरी तरह खत्म करने के लिए शिक्षा मंत्री ने सभी राज्यों के जिला मजिस्ट्रेटों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सीधे मैदान में उतार दिया है। परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यह री-एग्जाम इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि 3 मई को हुई पिछली परीक्षा को पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद्द करना पड़ा था। इस बार सरकार किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। जहां एक तरफ डिजिटल दुनिया में अफवाहबाजों पर नकेल कसी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की सुविधा के लिए परिवहन, पीने के पानी और केंद्रों पर सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए हैं। देखना यह होगा कि सरकार का यह डिजिटल और जमीनी चक्रव्यूह इस बार सॉल्वर गैंग और अफवाहबाजों के इरादों को कितना नाकाम कर पाता है।