नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही मची है। सड़क, पुल और घर प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग लापता हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। PM मोदी ने नेपाल को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
Nepal Bhotekoshi Flood 2026: नेपाल में बुधवार की सुबह पहाड़ों से आई एक ऐसी आफत ने तबाही मचा दी, जिसका असर कुछ ही घंटों में कई इलाकों तक फैल गया। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बाजार, घर, सड़कें और पुलों के साथ बिजली परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं और इनमें विदेशी पर्यटकों के साथ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
भोटेकोशी में अचानक क्यों आया सैलाब?
बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। नेपाल के वैज्ञानिकों के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक तिब्बत की ओर बर्फीले हिस्से के खिसकने से ल्हेंडे नदी का प्रवाह बाधित हुआ और उसके बाद पानी अचानक नीचे की ओर आया। कुछ रिपोर्टों में भूकंप या ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, घटना के सटीक ट्रिगर की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है।
रसुवा के तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। सड़क संपर्क बाधित होने के कारण कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है।
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भारतीय नागरिकों को लेकर बढ़ी चिंता
इस आपदा ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सैकड़ों यात्री और विदेशी नागरिक लापता हैं, जिनमें 100 से ज्यादा भारतीय नागरिक होने की जानकारी सामने आई है। कई लोग कैलाश-मानसरोवर यात्रा से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि, लापता लोगों की संख्या और पहचान लगातार अपडेट हो रही है, इसलिए आंकड़ों को अंतिम नहीं माना जा सकता। भारतीय उच्चायोग ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए आपात संपर्क नंबर भी जारी किए हैं। ऐसे समय में प्राथमिकता लापता लोगों की लोकेशन पता करने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की है।
PM मोदी ने Balen Shah से की बात, भारत देगा हर संभव मदद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर जान-माल के नुकसान पर संवेदना जताई। उन्होंने नेपाल को हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भरोसा दिया। नेपाल सरकार ने भी भारत और चीन से बचाव एवं राहत अभियान में सहयोग का अनुरोध किया है।
भारत के लिए यह मदद इसलिए महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि प्रभावित पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने से जमीनी राहत अभियान कठिन है। हेलिकॉप्टरों के जरिए खोज-बचाव, मेडिकल टीम और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना ऐसे दुर्गम इलाकों में अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल नेपाल में 14 हेलिकॉप्टर खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगाए गए हैं।
आगे भी खतरा, नदी किनारे रहने वालों को अलर्ट
नेपाल सरकार ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। बाढ़ का पानी आगे भी नदी के निचले हिस्सों की ओर बढ़ रहा है और प्रशासन संभावित अतिरिक्त खतरे पर नजर बनाए हुए है। इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में शुरुआती चेतावनी प्रणाली और सीमा-पार आपदा सूचना साझा करने की जरूरत को भी सामने ला दिया है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे और बाधित संपर्क के बीच लापता लोगों को तलाशना, घायलों तक इलाज पहुंचाना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित करना है।
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