नेपाल में भयानक आई बाढ़ के बाद अब मरम्मत पर 5 अरब डॉलर तक खर्च आने का अनुमान है। ये रकम नेपाल की कुल अर्थव्यवस्था का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा है।
Nepal Flood Reconstruction Cost: नेपाल में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही मची है। जानमाल के नुकसान के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था काफी पीछे चली गई है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के मुताबिक, इस सप्ताह आई भयानक बाढ़ के बाद देश को दोबारा खड़ा करने के लिए 4 से 5 अरब डॉलर (475,000,000,000 रुपए) तक की जरूरत पड़ सकती है। यह राशि नेपाल की अर्थव्यवस्था के करीब दसवें हिस्से के बराबर है। नेपाली वित्त मंत्री वागले के मुताबिक 4 से 5 अरब डॉलर का आंकड़ा फिलहाल शुरुआती अनुमान है। उनके मुताबिक, 2015 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद जितनी राशि की जरूरत पड़ी थी, इस बार उससे कम खर्च होने की उम्मीद है। हालांकि, बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन अभी किया जा रहा है।
2015 के भूकंप से कितनी अलग है यह आपदा?
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने विस्तार से यह नहीं बताया कि इस बार पुनर्निर्माण की लागत 2015 के भूकंप के मुकाबले कम क्यों रहने की उम्मीद है। 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे देश की अब तक की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। उस भूकंप के बाद पुनर्निर्माण पर करीब 9 अरब डॉलर खर्च हुए थे। भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी और 5 लाख से ज्यादा घर नष्ट हो गए थे। इसके कारण नेपाल की अर्थव्यवस्था का करीब एक-तिहाई हिस्सा प्रभावित हुआ था।
टूरिज्म, रेमिटेंस और बिजली क्षेत्र पर बड़ा असर
बुधवार की बाढ़ नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है। देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक विदेश से आने वाली कमाई यानी रेमिटेंस, पर्यटन और हाइड्रोपावर पर निर्भर है। बाढ़ से कई बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। ये परियोजनाएं देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 12 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखती हैं। ऐसे में बिजली क्षेत्र को हुए नुकसान का असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
पुनर्निर्माण में लग सकते हैं अरबों डॉलर
विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी शनिवार को कहा कि इस भयानक बाढ़ के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण और पुनर्वास पर अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं। काठमांडू में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "पुनर्निर्माण और पुनर्वास में शायद अरबों डॉलर का खर्च आएगा।" उन्होंने कहा कि सरकार पहले नुकसान का पूरा आकलन करेगी और उसके बाद पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जाएगी। साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी।
फिलहाल बचाव और जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता
आपदा के तीन दिन बाद शिशिर खनाल ने कहा कि इस समय सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बचाव अभियान चलाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाना है। हालांकि, उन्होंने माना कि आपदा का पैमाना इतना बड़ा है कि इससे सरकार की मौजूदा क्षमता पर काफी दबाव पड़ रहा है। बचाव दलों ने अब तक 919 शव बरामद किए हैं, जबकि नेपाल में हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
शवों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती
विदेश मंत्री खनाल ने बरामद शवों की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए विशेष मदद की अपील की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ऐसे देशों और सहयोगियों से संपर्क किया है, जो बचाव कार्य के साथ-साथ इस तरह की विशेष जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। खनाल ने कहा कि बहाव की दिशा में आगे बढ़ने पर सैकड़ों शव मिले हैं। इनमें से कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण तेजी से खराब होने की स्थिति में हैं।
फ्रीजर ट्रकों की मांगी जा रही मदद
खनाल के मुताबिक, नेपाल की अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में शवों को लंबे समय तक फ्रीज करके सुरक्षित रखने की क्षमता बहुत सीमित है। उन्होंने कहा कि सरकार तब तक के लिए फ्रीजर उपलब्ध कराने की मांग कर रही है, जब तक इस आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों की पहचान नहीं हो जाती। उन्होंने बताया कि सरकार फ्रीजर ट्रक लाने पर भी विचार कर रही है। ऐसे ट्रकों का इस्तेमाल आमतौर पर जल्दी खराब होने वाले सामान को ठंडा रखकर सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक मदद जरूरी
आपदा के बाद शवों की पहचान करना भी अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल को इस काम के लिए बेहतर फोरेंसिक क्षमता की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शवों की सही पहचान के लिए DNA सैंपलिंग, DNA टेस्टिंग और रिपोर्टिंग की जरूरत है। उनके अनुसार, नेपाल में फिलहाल इन कामों के लिए फोरेंसिक क्षमता बहुत सीमित है। सरकार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मदद लेने की कोशिश कर रही है, ताकि बरामद शवों की पहचान की जा सके और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सके।


