Mount Everest Record: आखिर कैसे पूर्णिमा श्रेष्ठा ने सिर्फ 13 दिनों में तीन बार एवरेस्ट फतह कर रच दिया इतिहास? क्यों पूर्णिमा श्रेष्ठा की ट्रिपल एवरेस्ट चढ़ाई को महिलाओं के लिए बड़ी प्रेरणा माना जा रहा है? ऑक्सीजन की कमी और जानलेवा मौसम के बीच तीन बार एवरेस्ट चढ़ना कितना मुश्किल होता है?
नेपाल की पर्वतारोही पूर्णिमा श्रेष्ठा ने सिर्फ 13 दिनों के अंदर तीन बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़कर इतिहास रच दिया है। ऐसा करने वाली वह दुनिया की पहली महिला बन गई हैं। उनके इस असाधारण कारनामे की दुनिया भर में तारीफ हो रही है और इसे पर्वतारोहण के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पूर्णिमा श्रेष्ठा ने मौजूदा क्लाइंबिंग सीजन में अपनी तीसरी सफल चढ़ाई पूरी की। यह उनकी ज़बरदस्त सहनशक्ति, लगन और मानसिक मजबूती को दिखाता है। एवरेस्ट पर एक बार भी चढ़ना दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक माना जाता है, ऐसे में उनका यह रिकॉर्ड तोड़ कारनामा और भी खास हो जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रेष्ठा ने इस महीने की शुरुआत में पहली बार चोटी पर पहुंची थीं और फिर दो हफ्तों से भी कम समय में दो और चढ़ाई पूरी की। इस उपलब्धि ने उन्हें नेपाल के सबसे कामयाब पर्वतारोहियों में से एक बना दिया है। यह रिकॉर्ड तोड़ उपलब्धि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जहां यूजर्स ने उनके साहस और जज्बे की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने उन्हें दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बताया, खासकर एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में, जहां आमतौर पर पुरुषों का दबदबा रहा है।
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, "यह वाकई एक अविश्वसनीय उपलब्धि है," जबकि दूसरे ने कमेंट किया, "असली हिम्मत इसे कहते हैं।" कई लोगों ने इतने कम समय में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर बार-बार चढ़ने के लिए जरूरी उनकी शारीरिक और मानसिक ताकत की भी सराहना की। पूर्णिमा श्रेष्ठा सिर्फ पर्वतारोहण के लिए ही नहीं, बल्कि एक फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर अपने काम के लिए भी जानी जाती हैं। पिछले कुछ सालों में, उन्होंने हिमालय में अभियानों और चुनौतीपूर्ण यात्राओं को कैमरे में कैद करके नेपाल में एक मजबूत पहचान बनाई है। उनकी इस ताजा उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका कद और बढ़ा दिया है।
इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई का सीजन काफी सफल रहा है, हालांकि मौसम की मुश्किलें और खतरनाक रास्ते हमेशा की तरह चुनौती बने रहे। समुद्र तल से 8,848.86 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट आज भी दुनिया भर के पर्वतारोहियों को अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को परखने के लिए आकर्षित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में बार-बार चढ़ाई के लिए असाधारण ताकत की जरूरत होती है, क्योंकि पर्वतारोहियों को पूरे अभियान के दौरान कड़ाके की ठंड, ऑक्सीजन की कमी और जानलेवा खतरों का सामना करना पड़ता है।
जैसे-जैसे उनकी इस उपलब्धि की खबर दुनिया भर में फैल रही है, पूर्णिमा श्रेष्ठा को दृढ़ता और महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना जा रहा है। उनकी ऐतिहासिक ट्रिपल चढ़ाई ने न केवल एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि अनगिनत एडवेंचर प्रेमियों को बड़े सपने देखने और सीमाओं से परे जाने के लिए प्रेरित किया है।
