नोएडा के ममूरा में 5 मंजिला इमारत की पार्किंग से उठी एक चिंगारी ने दो जिंदगियां छीन लीं। क्या EV चार्जिंग बनी मौत की वजह? जांच में चौंकाने वाले खुलासों की उम्मीद।
Noida Fire Accident: दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-66 स्थित ममूरा इलाके से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। बुधवार के सामान्य दिन की शुरुआत अचानक चीख-पुकार और काले धुएं के गुबार में बदल गई। यहां की एक पांच मंजिला आवासीय इमारत में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस भयावह हादसे में एक 26 साल की युवती और एक पुरुष की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय इमारत के अंदर करीब 50 से अधिक परिवार मौजूद थे, जिनकी सांसें हवा में फैले जहरीले धुएं के बीच अटक गईं।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर: जब मौत बनकर फैला धुआं
मामूरा गांव की इस 'जी-प्लस-फोर' (G+4) बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर अमूमन गाड़ियों की पार्किंग होती थी। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक ग्राउंड फ्लोर से शुरू हुई आग की लपटों ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। चूंकि इमारत में कोई बेसमेंट नहीं था, इसलिए पार्किंग एरिया से उठा जहरीला और काला धुआं सीढ़ियों के रास्ते तेजी से ऊपर की मंजिलों की तरफ फैलने लगा। कमरे के भीतर सो रहे और अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हर मंजिल पर बने करीब 12 कमरों और फ्लैटों में धुआं इस कदर भर गया कि लोगों का दम घुटने लगा। लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों की तरफ भागे और मदद के लिए चिल्लाने लगे।
मौत के मुहाने से रेस्क्यू: सीढ़ियों और खिड़कियों से बची 50 जिंदगियां
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गौतम बुद्ध नगर के जॉइंट कमिश्नर राजीव नारायण ने बताया कि फायर सर्विस की टीम बिना कोई वक्त गंवाए मौके पर पहुंची। राहत और बचाव कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू किया गया:
- आग पर काबू पाने और फंसे लोगों को निकालने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और 7 दमकल गाड़ियों को तैनात किया गया।
- दमकलकर्मियों ने जांबाजी दिखाते हुए जलती इमारत के सामने वाली बिल्डिंग से लोहे की सीढ़ियां लगाईं।
- दम घुटने से बदहवास हो चुके कई लोगों को खिड़कियों के रास्ते बाहर खींचा गया।
काफी मशक्कत के बाद लगभग सभी निवासियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन जहरीले धुएं की चपेट में आ चुके दो लोगों की हालत बेहद नाजुक थी। उन्हें तुरंत एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में भर्ती दो अन्य घायलों की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है।
आखिर कैसे लगी आग? इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग का वो खतरनाक सच
शुरुआती जांच में जो सच सामने आया है, वह हर किसी को सतर्क करने वाला है। जॉइंट कमिश्नर के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग में एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को चार्ज पर लगाया गया था। चार्जिंग के दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ और एक चिंगारी भड़की। यह चिंगारी पास में ही खड़ी पेट्रोल से चलने वाली अन्य गाड़ियों तक पहुंच गई। पेट्रोल टैंकों के संपर्क में आते ही आग ने एक धमाके के साथ रफ्तार पकड़ ली और पूरी पार्किंग आग का गोला बन गई।
कानून का शिकंजा: मालिक और लीजहोल्डर हिरासत में
इस दर्दनाक लापरवाही ने दो बेकसूर लोगों की जान ले ली और दर्जनों जिंदगियों को खतरे में डाल दिया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए फेज-3 पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस दर्दनाक हादसे की जिम्मेदारी तय करते हुए इमारत के मालिक और लीजहोल्डर दोनों को तुरंत हिरासत में ले लिया है। अब इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इस बहुमंजिला इमारत में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम थे या फिर चंद रुपयों के लालच में नियमों को ताक पर रखकर 50 से अधिक परिवारों की जान जोखिम में डाली गई थी।
जॉइंट कमिश्नर ने क्या बताया?
गौतम बुद्ध नगर के जॉइंट कमिश्नर राजीव नारायण ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही फायर सर्विस की टीम न्यूनतम समय में मौके पर पहुंच गई थी। उन्होंने बताया कि जिस इमारत में आग लगी, वह G+4 स्ट्रक्चर है, जहां लगभग 50 परिवार रहते हैं। इमारत में बेसमेंट नहीं था, बल्कि ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग बनाई गई थी। आग और धुआं यहीं से ऊपर की ओर फैला, जिससे ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी कहा कि हर मंजिल पर करीब पांच परिवार रहते हैं और लगभग 12 कमरों को दो-कमरों वाले फ्लैट के रूप में विकसित किया गया था।


