Noida Protest News : नोएडा मे प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है। कई जगह तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। सैलरी बढ़ोतरी, ओवरटाइम भुगतान और साप्ताहिक छुट्टी को लेकर हंगामा जारी है।
गौतम बुद्ध नगर यानि नोएडा में सोमवार को वो तांडव देखा गया जैसे कभी दंगों के वक्त देखा जाता जा है। जगह-जगह आगजनी-तोड़फोड, हिंसा और कर्मचारियों को पथराव करते देखा गया। पुलिस ने जब इनको रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस पर ही पत्थरबाजी की और उनकी गाड़ियां जला डाली। बता दें क प्राइबेट कंपनियों के कर्मचारी इसलिए उग्र हुए कि बड़ी बड़ी कंपनी उनसे 12 से 14 घंटे काम कराकर तगड़ा मुनाफा कमा रही हैं। वहीं इन कर्मचारियों को महज 12 से 15 हजार रुपए सैलरी दी जा रही है। जबकि कागजों में इनका वेतन 25 हजार रुपए बताया जाता है। इसलिए यह लोग हिंसा पर उतर आए।
ये वो कंपनियां जिनके कर्मचारी सड़क पर उतरे
बताया जा रहा है कि इस विरोध- प्रदर्शन में 6 कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों ने जिन कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उस लिस्ट में नोएडा के इंडस्ट्रियल की मदरसन, ऋचा ग्लोबल, रेनबो, पैरामाउंट और एसएनडी के नाम शामिल हैं। यह कंपनिया काफी बड़ी और पुरानी हैं। जिनके 500 से ज्यादा कर्मचारी कंपनी के बाहर जमा हुए और प्रदर्शन करने लगे। लेकिन अब इस विरोध में कई कंपनियों के हजारों वर्कर सड़क पर उतरे हैं।
सरकार और प्रशास ने कर्मचारियों की बातें मानी
बता दें कि यह धरना सबसे पहले नोएडा का फेज-2 इलाका इंडस्ट्रियल एरिया में शुरू हुआ था। लेकिन अब सैकड़ों कर्मचारी नोएडा के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन कर रहे हैं। सेक्टर 1, 15 और 62 में सड़क पर बैठकर कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। कई चौंक-चौराहों पर लंबा जाम लगा हुआ है। पुलिस ने प्रदर्शन को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले बरसाए, फिर भी कर्मचारी डटे रहे। यूपी सरकार के श्रम मंत्री से लेकर नोएडा की डीएम मेगा रुपम ने कर्मचारियों से शांति बनाने की अपील की है। साथ ही कहा कि आपकी सारी मांगे मानी जाएंगी। सैलरी बढ़ाने से लेकर ओवरटाइम का बोनस और समय पर वेतन के साथ वीक में एक छुट्टी भी दी जाएगी।
योगी सरकार ने कर्मचारियों के हित के लिए बनाए कमेटी
बता दें कि कर्मचारियों के हिंसक रूप को देखते हुए योगी सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है। जो जल्द से जल्द इनकी बातों को सुनेगा और कंपनियों के साथ बैठक कर वर्करों के हित में फैसले लिए जाएंगे। इस कमेटी में औद्योगिक विकास आयुक्त अध्यक्ष होंगे, जबकि अपर मुख्य सचिव (एमएसएमई), प्रमुख सचिव (श्रम) और श्रम आयुक्त सदस्य हैं। श्रमिक संगठनों के 5 और उद्यमी संघ के 3 प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं।
जानिए कंपनियों का क्या कहना है?
- वहीं जिन निजी कंपनियों के खिलाफ यह कर्मचारी विरोध कर रहे हैं उन कंपनियों ने गेट के बाहर एक एक नोटिस लगाया हुआ है। जिसमें लिखा गया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। वहीं डिक्सन कंपनी ने कर्मचारियों के लिए नोटिस लगाते हुए कहा कि आपकी मागों पर सहमति बनाई गई है। मदरसन कंपनी नोटिस लगाकर कहा है कि
- कुछ बाहरी तत्व कर्मचारियों के साथ मिलकर वेतन वृद्धि को लेकर भ्रामक अफवाहें फैला रहे हैं। साथ ही लिखा है कि हमारी कंपनी समस्त श्रम कानूनों एवं नियमों का पूर्णतः पालन करती है। सरकार के नियमों के हिसाब से वेतन दिया जाता है।


