16वीं सदी के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां फिर चर्चा में हैं। उनकी कविताओं की तुलना आज के ड्रोन हमलों ("मधुमक्खियों का झुंड") और मध्य पूर्व के "सात महीने के युद्ध" से की जा रही है। हालांकि, उनकी सांकेतिक भाषा के कई अर्थ संभव हैं।

दुनिया में जब भी राजनीतिक तनाव बढ़ता है, 16वीं सदी के भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस (Nostradamus) की पुरानी भविष्यवाणियां चर्चा में आ जाती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि 2026 में होने वाली कुछ घटनाएं, खासकर खाड़ी देशों में छिड़ी जंग, नास्त्रेदमस की लिखी बातों से मेल खाती हैं। तो क्या नास्त्रेदमस की बातों में वाकई आज की घटनाओं के संकेत छिपे हैं? आइए जानते हैं पूरा मामला।

कौन थे नास्त्रेदमस?

नास्त्रेदमस का असली नाम मिशेल डी नोस्ट्रेडेम (Michel de Nostredame) था। वह फ्रांस के एक ज्योतिषी और डॉक्टर थे। 1555 में उन्होंने 'लेस प्रोफेटीज' (Les Propheties) नाम की एक किताब छापी थी। इस किताब में कविताओं के रूप में करीब एक हजार भविष्यवाणियां लिखी गई हैं। इन कविताओं को “क्वाट्रन” (quatrains) कहा जाता है। इनमें किसी तारीख या जगह का साफ-साफ जिक्र नहीं है। इन्हें पहेलियों, संकेतों और घुमावदार भाषा में लिखा गया है।

“मधुमक्खियों का झुंड” का क्या है मतलब?

नास्त्रेदमस की एक कविता में लिखा है: “मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड उठेगा।।। और रात में हमला होगा।।।”

कुछ लोग इसकी तुलना आज के ड्रोन युद्ध से कर रहे हैं। उनका कहना है कि रात में उड़ने वाले ड्रोन जब दुश्मनों पर हमला करते हैं, तो वे मधुमक्खियों के झुंड जैसे ही लगते हैं। इसलिए यह भविष्यवाणी ड्रोन्स की तरफ इशारा करती है। आज की लड़ाइयों में ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। इनसे निगरानी, टारगेट पर हमला और झुंड में अटैक किया जा रहा है।

“सात महीने के युद्ध” की चेतावनी

नास्त्रेदमस की एक और कविता में कहा गया है: “सात महीने तक महान युद्ध, बुराई के कारण लोग मरेंगे।।।”

इस बात का मतलब मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाली जंग से निकाला जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने ईरान पर हमला किया है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (Human Rights Activists News Agency) के मुताबिक, इस जंग में अब तक एक हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसी वजह से नास्त्रेदमस की “सात महीने के युद्ध” वाली भविष्यवाणी फिर से चर्चा में है। ईरान ने भी खाड़ी के कई देशों पर हमला किया है और उत्तर कोरिया भी आंखें दिखा रहा है, जिससे लगता है कि यह युद्ध और फैल सकता है।

एक और कविता में नास्त्रेदमस लिखते हैं: “जब मंगल ग्रह अपनी राह पर चलेगा तो इंसानी खून बहेगा। पूरब से तीन आग उठेंगी। पश्चिम अपनी रोशनी खो देगा।”

प्राचीन रोमन संस्कृति में “मंगल” (Mars) को युद्ध का देवता माना जाता है। इसलिए कुछ जानकार इसे एक बड़े वैश्विक संघर्ष का संकेत मानते हैं।

हालांकि, इतिहासकार कहते हैं कि नास्त्रेदमस की कविताएं बहुत उलझी हुई हैं। उनमें फ्रेंच, लैटिन और सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल हुआ है। इसलिए उनके कई अलग-अलग मतलब निकाले जा सकते हैं।

फिर भी, जब भी दुनिया में कोई बड़ी घटना होती है - जैसे युद्ध, आर्थिक संकट, महामारी या राजनीतिक उथल-पुथल - लोग उनकी भविष्यवाणियों को खंगालने लगते हैं। 1566 में नास्त्रेदमस की मौत हो गई थी, लेकिन सदियों बाद भी उनकी लिखी बातें लोगों में दिलचस्पी जगाती हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, उनकी पुरानी कविताएं एक बार फिर बहस का मुद्दा बन गई हैं। लेकिन ये भविष्यवाणियां वाकई आज की घटनाओं का संकेत हैं या सिर्फ बाद में मतलब निकाला गया है, यह अभी भी एक सवाल ही है।