एक वायरल पोस्ट के अनुसार, कई NRI 5-6 करोड़ रुपये कमाने के बाद भी भारत नहीं लौटते। इसका कारण विदेश में आसान ज़िंदगी है। भारत में भ्रष्टाचार, खराब वर्क कल्चर, ट्रैफिक और तनाव जैसी समस्याएं उन्हें वापस आने से रोकती हैं।

कोई भी इंसान अपना देश छोड़कर परदेस में बसने का फैसला कई वजहों से लेता है। लेकिन सबसे बड़ी वजह होती है बेहतर ज़िंदगी के लिए ज़्यादा पैसा कमाना। पर क्या हो जब कोई करोड़ों रुपये कमाने के बाद भी अपने देश वापस ही न लौटना चाहे? एक NRI ने सोशल मीडिया पर इसी सवाल का जवाब दिया है, जो अब वायरल हो गया है। अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि विदेश में 5-6 करोड़ रुपये की बचत करने के बाद भी कई भारतीय वापस नहीं आते।

सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव

हर साल हज़ारों भारतीय अच्छी पढ़ाई, ज़्यादा सैलरी वाली नौकरी और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए विदेश जाते हैं। कनाडा, अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आज भी प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए पसंदीदा जगहें बनी हुई हैं। इसी बारे में स्वप्निल कोम्मावर नाम के एक यूज़र ने 'X' पर एक पोस्ट लिखा। उन्होंने कनाडा में रहने वाले अपने एक दोस्त से हुई बातचीत का ज़िक्र किया।

स्वप्निल ने लिखा, "मेरे दोस्त ने बताया कि 5-6 करोड़ रुपये कमाने के बाद भी बहुत से लोग भारत वापस आने का मन नहीं बनाते। ऐसा नहीं है कि वे भारत से नफरत करते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वहां (विदेश में) ज़िंदगी ज़्यादा आसान है।" दोस्त के मुताबिक, इसकी वजह भारत में आज भी मौजूद भ्रष्टाचार, खराब वर्क कल्चर, ट्रैफिक, रोज़ का मानसिक तनाव और गंदगी है। स्वप्निल ने आखिर में जोड़ा कि यह कोई जजमेंट नहीं है, उन्होंने बस अपने दोस्त की कही बात शेयर की है।

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लोगों ने भी सहमति जताई

यह पोस्ट वायरल होते ही भारत के वर्क कल्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर और लाइफस्टाइल पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने कमेंट्स में लिखा कि वे स्वप्निल के दोस्त की बातों से पूरी तरह सहमत हैं। लोगों ने कहा कि प्रवासियों का अपने देश से सिर्फ एक भावनात्मक रिश्ता रह गया है, लेकिन प्रैक्टिकल लाइफ में वे एक बेहतर ज़िंदगी चाहते हैं।

एक यूज़र ने लिखा, "एकदम सही बात है। भारत में हर नौकरी थका देने वाली है। मैं यहां जल्दी बूढ़ा हो रहा हूं। मज़ाक नहीं कर रहा। अंदाज़ा लगाइए क्या? दिक्कत सरकार नहीं, बल्कि हर भारतीय का एटीट्यूड और कल्चर है। कोई भी सही तरीके से काम नहीं करना चाहता, सब शॉर्टकट अपनाते हैं। पूरा सिस्टम एक जंग लगी पुरानी कार जैसा हो गया है।" वहीं, कई लोगों ने यह भी बताया कि कई विदेशी देशों में हफ्ते में चार या पांच दिन ही काम करना होता है, जबकि भारत में लोगों को 24/7 काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।