पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान 24 घंटे में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलेगा और अमेरिका प्रतिबंध हटाएगा। इजरायल इस समझौते का हिस्सा नहीं है और सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए एक अहम शुरुआती शांति समझौते पर 24 घंटे के अंदर दस्तखत किए जाएंगे। शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी दी और बताया कि अगले हफ्ते तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहेगी। अमेरिकी सूत्रों ने भी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच समझौते की शर्तों पर सहमति बन गई है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्जी ने दावा किया है कि इस जंग में जीत उनकी हुई है। हालांकि, पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही इस शांति वार्ता में इजरायल का शामिल न होना अभी भी एक बड़ी रुकावट बना हुआ है।

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सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता जिनेवा में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वान्स और ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बकर खालिबाफ के बीच हो सकता है। खबर है कि इस डील के तहत ईरान अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा, जिसे उसने बंद कर दिया था। इसके बदले में अमेरिका, ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा, ईरान की जब्त की गई अरबों डॉलर की संपत्ति को रिलीज करेगा और ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में भी ढील देगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए आगे भी बातचीत जारी रहेगी।

अमेरिका का दावा है कि इस समझौते से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुख्य लक्ष्य पूरे होंगे। अमेरिका के बड़े अधिकारियों का कहना है कि ईरान को फंड तभी दिया जाएगा, जब वह समझौते की शर्तों का ठीक से पालन करेगा। यह पूरी तरह से एक परफॉर्मेंस-आधारित डील है। शांति वार्ता की खबरों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में नई सैन्य हलचल भी देखी गई है। खबर है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ड्रोन्स को मार गिराया है, जो व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बनकर होर्मुज की तरफ बढ़ रहे थे। यह भी रिपोर्ट है कि ईरानी सेना ने बिना इजाजत सीमा पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर फायरिंग की। ईरान के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ओमान के साथ मिलकर ईरान का ही नियंत्रण रहेगा और इस इलाके में उनकी बादशाहत कायम रहेगी।

वहीं, अमेरिका के साथ इस जंग में शामिल रहे इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह इस शांति समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह बयान दिया है। अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद की वजह ट्रंप की वह मांग है, जिसमें उन्होंने इजरायल से लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने को कहा था। ईरान दावा कर रहा है कि इस नए समझौते से लेबनान में जंग खत्म हो जाएगी और इजरायल को पीछे हटना पड़ेगा। लेकिन इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।