रावलपिंडी शहर की सुरक्षा सेना के हवाले कर दी गई है। 'संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों' के लिए सेना की 3 कंपनियों को तैनात किया गया है। यह तैनाती तत्काल प्रभाव से अगले 6 महीनों के लिए लागू की गई है।
रावलपिंडी: पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में सुरक्षा व्यवस्था अब सेना के हवाले कर दी गई है। सरकार ने पाकिस्तानी सेना की तीन कंपनियों को शहर में तैनात करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला फौरन लागू हो गया है और सेना की यह तैनाती अगले छह महीनों तक जारी रहेगी। यह कदम उस हमले के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया है जो रावलपिंडी में स्थित सेना के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) के पास हुआ था। हालांकि सरकार ने सीधे तौर पर इसे हमले से नहीं जोड़ा है, लेकिन इस फैसले का समय अपने आप में काफी कुछ कहता है। GHQ के इतने करीब हुई घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ना लाजिमी था।
क्यों और कितने समय के लिए हुई तैनाती?
आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि सेना की इन टुकड़ियों को 'संवेदनशील सुरक्षा कर्तव्यों' (sensitive security duties) के लिए तैनात किया जा रहा है। रावलपिंडी सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना का पावर सेंटर है, जहां GHQ समेत कई महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान हैं। ऐसे में यहां 'संवेदनशील सुरक्षा' का मतलब बेहद अहम हो जाता है।
यह तैनाती कोई छोटी-मोटी या कुछ दिनों की कवायद नहीं है। सरकार ने पूरे छह महीने के लिए सेना को शहर की सुरक्षा में लगाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन को लग रहा है कि सुरक्षा का खतरा लंबे समय तक बना रह सकता है और हालात को सामान्य करने में वक्त लगेगा।
सेना की तीन कंपनियों को तत्काल प्रभाव से तैनात करने का आदेश दिखाता है कि सरकार स्थिति को कितनी गंभीरता से ले रही है। आमतौर पर ऐसे फैसले तभी लिए जाते हैं जब खुफिया इनपुट या मौजूदा हालात किसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहे हों। फिलहाल, शहर में सेना की मौजूदगी से सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने की कोशिश की जा रही है।


