पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के लिए आवाज़ उठाने वाली मशहूर एक्टिविस्ट डॉ. माहरंग बलोच को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। वो सालों से बलूचिस्तान में लोगों के गायब होने और मानवाधिकार हनन के खिलाफ लड़ रही हैं।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. माहरंग बलोच को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। माहरंग बलूचिस्तान में लोगों को जबरन गायब किए जाने और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ एक बड़ी आवाज़ हैं। क्वेटा की एक एंटी-टेररिज़्म कोर्ट ने उन्हें 2024 में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पैरामिलिट्री अफसर की हत्या के मामले में यह सज़ा दी है। माहरंग और उनके वकीलों ने इस केस को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पूरी अदालती कार्यवाही का बहिष्कार किया था।

माहरंग 'बलोच यूनिटी कमेटी' (BYC) की नेता हैं, जो बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करती है। कोर्ट ने संगठन के एक और नेता सिब्गतुल्लाह को भी उम्रकैद की सज़ा दी है। इसके अलावा, दोनों को मारे गए अफसर के परिवार को 2-2 लाख पाकिस्तानी रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया गया है।
मामला जुलाई 2024 का है। प्रॉसिक्यूशन का कहना है कि पोर्ट सिटी ग्वादर में BYC के एक प्रदर्शन के दौरान माहरंग ने भड़काऊ भाषण दिया था। इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई और उसने फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अफसर शब्बीर अहमद की पीट-पीटकर हत्या कर दी। वहीं, संगठन का कहना है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और उनके खिलाफ झूठे सबूत गढ़े गए। माहरंग की बहन और वकील नादिया बलोच ने बताया कि केस की सुनवाई जेल के अंदर गुपचुप तरीके से पूरी की गई और बचाव पक्ष को गवाहों से जिरह करने का मौका तक नहीं दिया गया।
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission of Pakistan) ने इस फैसले को न्याय व्यवस्था के लिए एक चुनौती बताया है। आयोग ने कहा कि यह फैसला पाकिस्तानी सरकार की उस भेदभावपूर्ण नीति को दिखाता है, जो शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्षों और आतंकवाद को एक ही तराजू में तौलती है। स्वीडन की मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी इस फैसले की निंदा की है।
माहरंग बलोच को BBC ने 2024 की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में शामिल किया था। उन्हें पाकिस्तान में बलोच लोगों के अधिकारों की लड़ाई का चेहरा माना जाता है। माहरंग तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने अपने पिता के लिए न्याय की लड़ाई शुरू की। उनके पिता को 2009 में सुरक्षाबलों ने अगवा कर लिया था और बाद में उनकी लाश मिली थी, जिस पर टॉर्चर के निशान थे। 2023 में उन्होंने सैकड़ों महिलाओं के साथ इस्लामाबाद तक एक लंबा मार्च निकाला था। यह मार्च उन लोगों के लिए था जिनके परिवार के सदस्य लापता हैं। इस मार्च ने दुनियाभर का ध्यान खींचा था।
