मुनीर-शरीफ की अपने ही देश में घनघोर बेइज्जती, जानें कौन बना वजह?
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के लिए ट्रंप की नाराजगी मोल लेना आसान नहीं था। ऐसे में जब ट्रंप ने पाकिस्तान को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, तो पाकिस्तान ने इसे तुरंत कबूल लिया। अब उनकी किरकिरी हो रही है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान गाजा में ‘शांति’ से जुड़ी हर पहल का हिस्सा बनना चाहता है और इसी भावना के तहत उसने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का फैसला किया है।
पाकिस्तान सरकार के फैसले पर देश में विरोध
हालांकि शहबाज-मुनीर की हाइब्रिड सरकार ने ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, लेकिन पाकिस्तान के भीतर इस फैसले का तीखा विरोध शुरू हो गया है। देश के कई एक्सपर्ट्स, पूर्व राजनयिक और बुद्धिजीवी इस कदम को गलत और जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहे हैं।
मलीहा लोधी ने बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत रह चुकीं मलीहा लोधी ने पाकिस्तान सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पहल लंबे समय तक टिकने वाली नहीं लगती। मलीहा ने कहा, पाकिस्तान एक ऐसे संगठन में शामिल हो रहा है जिसे ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
‘क्या ट्रंप को खुश करना सिद्धांतों से ज्यादा जरूरी हो गया?’
मलीहा लोधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान के लिए ट्रंप को खुश करना अपने सिद्धांतों पर टिके रहने से ज्यादा जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक ऐसे बोर्ड में शामिल हो रहा है, जिसमें इजरायल भी सदस्य है।
इजरायल की मौजूदगी पर जताई आपत्ति
पूर्व राजदूत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है और दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। उन्होंने गाजा से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए पूछा कि क्या बोर्ड ऑफ पीस ऐसी ‘शांति’ को बढ़ावा देगा, जिसमें आम नागरिक, बच्चे और पत्रकार मारे जा रहे हों।
बाबर अवान का हमला: ‘फिलिस्तीन से गद्दारी’
पाकिस्तान के पूर्व कानून मंत्री बाबर अवान ने शहबाज शरीफ सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि सिर्फ ट्रंप को खुश करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होना और युद्ध अपराधों के आरोप झेल रहे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मंच साझा करना फिलिस्तीनी मुद्दे से गद्दारी है।
पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की भी कड़ी प्रतिक्रिया
पत्रकार बकीर सज्जाद ने मुनीर-शरीफ के इस फैसले को ट्रंप की खुशामद और चापलूसी बताया कि ये मुस्लिम दुनिया की सबसे बड़ी पाखंडी राजनीति है। वहीं, पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और वकील मुस्तफा नवाज खोखर ने कहा कि यह फैसला बिना किसी सार्वजनिक बहस और संसद की मंजूरी के लिया गया है। इसकी स्थायी सदस्यता के लिए ली जाने वाली एक अरब डॉलर की फीस इसे अमीर देशों का क्लब बनाती है।
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