ईरानी कुर्द कौन हैं? क्या US उन्हें ईरान सरकार के खिलाफ ‘ग्राउंड फोर्स’ बना रहा है?
CIA Iran Plan: रिपोर्ट्स के मुताबिक CIA ईरानी कुर्दों को हथियार देकर IRGC पर दबाव बनाने की स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है। क्या यह ईरान रिजीम चेंज की शुरुआत है या मिडिल ईस्ट में नए युद्ध का संकेत है?

Iranian Kurds: मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। खबरें आ रही हैं कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ईरान में बगावत भड़काने के लिए कुर्दिश लड़ाकों को हथियार दे रही है। यह सब ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान में बड़े हवाई हमले हुए हैं और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरों ने सत्ता संकट खड़ा कर दिया है। तो आखिर ईरानी कुर्द कौन हैं, और अमेरिका उन्हें क्यों अहम मान रहा है? क्या यह सच में ईरान की सरकार को गिराने की बड़ी रणनीति है? और इसमें ईरानी कुर्दों की क्या भूमिका है?
ईरानी कुर्द कौन हैं और वे कहां रहते हैं?
कुर्द एक बड़ा जातीय समुदाय है, जिनकी आबादी करीब 2.5 से 3 करोड़ मानी जाती है। वे तुर्की, इराक, ईरान, सीरिया और आर्मेनिया के कुछ हिस्सों में फैले हुए हैं। उनका अपना कोई स्वतंत्र देश नहीं है। ईरान में रहने वाले कुर्द ज़्यादातर पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी इलाकों में बसे हैं, खासकर इराक बॉर्डर के पास। इराक में उन्हें कुछ हद तक स्वायत्त शासन मिला है, लेकिन ईरान में हालात अलग हैं।
क्या CIA कुर्दों को हथियार दे रही है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी ईरानी कुर्द ग्रुप्स से संपर्क में हैं। चर्चा ये है कि अगर कुर्द लड़ाके ईरानी सुरक्षा बलों को सीमा पर उलझा दें, तो बड़े शहरों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरी रणनीति में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र की भी अहम भूमिका हो सकती है। वहां से हथियारों की आवाजाही और ऑपरेशन की तैयारी आसान हो सकती है। लेकिन अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
IRGC की भूमिका क्या है और वह इतना शक्तिशाली क्यों है?
ईरान की सेना दो हिस्सों में बंटी है। एक है नियमित सेना (आर्टेश), और दूसरी है Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)। IRGC सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करता है। इसकी जिम्मेदारी सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है-यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम से लेकर क्षेत्रीय संघर्षों तक में सक्रिय है। आर्थिक और राजनीतिक मामलों में भी इसका गहरा असर है। अगर किसी विद्रोह की कोशिश होती है, तो सबसे बड़ी टक्कर IRGC से ही होगी।
क्या रेज़ा पहलवी वापसी की उम्मीद देख रहे हैं?
ईरान के आखिरी शाह के बेटे रज़ा पहलवी (Reza Pahlavi) ने हाल में ईरानी सेना से प्रदर्शनकारियों का साथ देने की अपील की है। वे कहते हैं कि मौजूदा शासन कमजोर हो रहा है। लेकिन उनका असली प्रभाव कितना है? वे दशकों से देश के बाहर हैं और ईरान के अंदर उनका समर्थन स्पष्ट नहीं है।
ईरान ने कुर्द ग्रुप्स पर क्या कार्रवाई की है?
हाल के महीनों में ईरान ने उत्तरी इराक में मौजूद कुर्द ग्रुप्स पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि ये “आतंकी ठिकाने” हैं जो देश के अंदर अशांति फैलाते हैं। इसके जवाब में कुछ कुर्द संगठनों ने भी खुले तौर पर विरोध और सैन्य तैयारी के संकेत दिए हैं।
क्या यह रणनीति सफल हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले कुर्द ग्रुप्स के पास इतना संसाधन और प्रभाव नहीं है कि वे अपने दम पर ईरान में सरकार बदल सकें। उन्हें बड़े स्तर पर बाहरी समर्थन की जरूरत होगी। साथ ही जोखिम भी बड़ा है-अगर बगावत असफल रही, तो कुर्द समुदाय को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
क्या कुर्द ग्रुप्स खुद तैयार हैं?
ईरानी कुर्द पार्टियां एकजुट नहीं हैं। अलग-अलग गुटों के बीच पुराने मतभेद हैं। कुछ ग्रुप्स ने हाल में बयान देकर कार्रवाई का संकेत दिया है, लेकिन अमेरिकी इंटेलिजेंस का आकलन है कि उनके पास अपने दम पर सफल विद्रोह के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। इसी वजह से वे अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य भरोसे की मांग कर रहे हैं।
क्या इससे इराक की संप्रभुता पर असर पड़ेगा?
इराक के उत्तरी हिस्से में कुर्द इलाका एक स्टेजिंग ग्राउंड बन सकता है। लेकिन इससे इराक की संप्रभुता पर सवाल उठ सकते हैं। पहले भी सीमा पार हमलों के कारण बगदाद और तेहरान के रिश्तों में तनाव रहा है। कई पूर्व अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि हथियारबंद मिलिशिया को मजबूत करना भविष्य में नियंत्रण से बाहर जा सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह ईरान में “रेजीम चेंज” की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ईरान के पूर्व शाही परिवार के सदस्य रेज़ा पहलवी भी मौजूदा शासन के खिलाफ खुलकर बोल चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग कर रहे हैं।
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