ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद होरमुज़ जलडमरूमध्य के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं। इसका फायदा जनता को देते हुए पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 74 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती की है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने खुद इसका ऐलान किया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट का फायदा पाकिस्तान ने अपनी जनता को दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के बाद पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने घोषणा की है कि पेट्रोल के दाम में 74 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। यह फैसला तब आया है जब पिछले शुक्रवार को अमेरिका और ईरान ने हफ्तों चली बातचीत के बाद एक शांति समझौते पर दस्तखत किए। इसके तुरंत बाद ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई।

सीधा फायदा जनता को
इस कटौती की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई गिरावट का पूरा फायदा सीधे जनता तक पहुंचा रही है। अरब न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, शरीफ़ ने संसद में तेल की कीमतों में "बड़ी" कटौती का वादा किया था और उसके कुछ ही घंटों बाद यह आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है, "पेट्रोल की कीमत 373 रुपये प्रति लीटर से घटकर 299 रुपये हो जाएगी, जबकि डीज़ल की कीमत 378 रुपये से घटकर 311 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए विकास बजट और अन्य खर्चों में कटौती से बचाए गए 129 अरब पाकिस्तानी रुपये का इस्तेमाल किया है।"
कैसे टला था बड़ा संकट?
यह पूरा संकट 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब इज़रायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं के मारे जाने की खबर थी। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों पर हमला कर दिया और होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था।
होरमुज़ दुनिया में तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता है। इसके बंद होते ही दुनियाभर में कच्चे तेल के दाम आसमान पर पहुंच गए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान समेत कई देशों में पेट्रोल-डीज़ल का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। अब ईरान-अमेरिका समझौते के बाद यह संकट टलता दिख रहा है।
