Somnath Temple 75th Anniversary: सोमनाथ मंदिर एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि यहां आज PM नरेंद्र मोदी 'कुंभाभिषेक' कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। गुजरात का यह मंदिर भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक जगहों में गिना जाता है। इसे कई बार तोड़ा गया और फिर दोबारा बनाया गया। आजादी के बाद पंडित नेहरू ने इसके पुनर्निर्माण का विरोध भी किया था।

PM Modi Somnath Visit: गुजरात का सोमनाथ मंदिर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमनाथ पहुंच रहे हैं, जहां मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 साल पूरे होने पर 'अमृत महोत्सव' मनाया जा रहा है। मंदिर के शिखर का 90 मीटर ऊंची क्रेन की मदद से 11 पवित्र तीर्थों के जल से 'कुंभाभिषेक' किया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस मंदिर को आज इतना भव्य रूप दिया जा रहा है, कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इसके पुनर्निर्माण के सख्त खिलाफ थे? आइए जानते हैं उस ऐतिहासिक विवाद की पूरी कहानी और आज के महा-आयोजन में क्या खास रहने वाला है...

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सोमनाथ मंदिर की कहानी क्या है?

सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में अरब सागर के किनारे मौजूद है। इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है। यही वजह है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इसकी बहुत बड़ी आस्था है। इतिहासकारों के मुताबिक, इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लूटा गया और फिर दोबारा बनाया गया। यही कारण है कि सोमनाथ सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की सांस्कृतिक पहचान का भी बड़ा प्रतीक माना जाता है।

सोमनाथ मंदिर को लेकर पंडित नेहरू को क्या आपत्ति थी?

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 1950-51 के दौरान जब मंदिर का काम जोरों पर था, तब नेहरू ने इसे लेकर करीब 17 खत लिखे थे। उनके विरोध के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े तर्क थे।

1. सेकुलर देश की छवि को खतरा

नेहरू का मानना था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है और सरकार को किसी खास धार्मिक प्रोजेक्ट से नहीं जुड़ना चाहिए। उन्हें डर था कि इससे विदेशों में भारत की छवि एक 'हिंदू राष्ट्र' जैसी बनेगी।

2. विदेशों में गलत संदेश

नेहरू को चिंता थी कि दुनिया भारत को एक 'पिछड़ा देश' समझने लगेगी। उन्होंने तत्कालीन मंत्री के.एम. मुंशी से कहा था कि यह 'हिंदू पुनरुत्थानवाद' है, जो उन्हें पसंद नहीं।

3. विकास पर फोकस

नेहरू का तर्क था कि जिस देश में गरीबी और भुखमरी हो, वहां मंदिर के बजाय बांध (Dams), फैक्ट्रियां और स्कूल-कॉलेज बनाना ज्यादा जरूरी है।

सोमनाथ मंदिर का फिर पुनर्निर्माण कैसे हुआ?

जब नेहरू विरोध कर रहे थे, तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने कसम खाई थी कि सोमनाथ का गौरव वापस लौटाया जाएगा। महात्मा गांधी ने बीच का रास्ता निकालते हुए सुझाव दिया कि मंदिर सरकारी खजाने के बजाय जनता के दान से बनना चाहिए। हुआ भी ऐसा ही, जूनागढ़ प्रशासन और आम लोगों के सहयोग से मंदिर खड़ा हुआ। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सरकारी पैसे से नहीं, बल्कि लोगों के सहयोग से कराया गया। 11 मई 1951 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू की नाराजगी के बावजूद सोमनाथ आकर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी। आज उसे ही 75 साल हो गए हैं।

सोमनाथ मंदिर में PM मोदी के कार्यक्रम को क्यों माना जा रहा खास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से भारतीय संस्कृति और मंदिरों से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देते रहे हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर राम मंदिर तक, कई बड़े धार्मिक प्रोजेक्ट उनके कार्यकाल में चर्चा में रहे। अब सोमनाथ मंदिर का यह आयोजन भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। कई लोग इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीति से जोड़कर देख रहा है।

'कुंभाभिषेक' क्या होता है?

कुंभाभिषेक मंदिर से जुड़ा एक बड़ा धार्मिक अनुष्ठान होता है। इसमें मंदिर के शिखर और गर्भगृह का विशेष पूजा-पाठ और पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। इसे मंदिर की ऊर्जा और पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है।

सोमनाथ मंदिर में आज क्या-क्या होगा खास?

75 साल बाद आज सोमनाथ में नजारा देखने लायक होगा। पीएम मोदी के इस दौरे में कई ऐसी चीजें होंगी जो पहली बार हो रही हैं। पहली बार मंदिर के ऊंचे कलश का अभिषेक 11 पवित्र स्थानों के जल से होगा। इसके लिए खास तौर पर 90 मीटर ऊंची क्रेन मंगवाई गई है। वायुसेना के चेतक हेलीकॉप्टर मंदिर पर फूलों की वर्षा करेंगे। अभिषेक के बाद 'सूर्यकिरण' टीम आसमान में 15 मिनट तक हैरतअंगेज करतब दिखाएगी। पीएम मोदी सोमनाथ हेलीपैड से वीर गोहिल की मूर्ति तक 2 किमी लंबा रोड शो भी करेंगे।