Somnath Temple Facts: सोमनाथ मंदिर से 5 रोचक फैक्ट, जिन्हें जान आप भी कहेंगे ‘OMG’
Somnath Temple Facts: गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रथम है। इसका इतिहास भी काफी प्राचीन है। इतिहासकारों की मानें तो 17 बार विदेश आक्रांताओं ने इस मंदिर को न सिर्फ लूटा बल्कि ध्वस्त भी किया।

जानें सोमनाथ मंदिर से जुड़े 5 रोचक फैक्ट
Somnath Temple Interesting Facts: शिव पुराण के अनुसार पूरे भारत वर्ष में 12 ज्योतिर्लिंग हैं। इनमें से सबसे पहला है गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित सोमनाथ। साल 2026 सोमनाथ मंदिर के दृष्टिकोण से बहुत ही खास है क्योंकि आज से करीब 1 हजार पहले यानी साल 1026 में ही महमूद गजनवी में इस मंदिर को ध्वस्त किया था। वहीं दूसरी वजह ये भी है कि वर्तमान में स्थित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को 75 वर्ष हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के 75 वर्ष पूर्ण होने को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व नाम दिया है। इस खास मौके पर जानिए सोमनाथ मंदिर से जुड़े 5 रोचक फैक्ट…
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किसने स्थापित किया सोमनाथ ज्योतिर्लिंग?
शिवपुराण के अनुसार चंद्रदेव को एक बार उनके ही ससुर दक्ष प्रजापति ने क्षय रोग होने का श्राप दे दिया, जिससे उनकी चमक मंद हो गई। तब इस रोग से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने शिवलिंग की स्थापना कर महादेव को घोर तपस्या की। प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें इस रोग से मुक्त कर दिया। चंद्रमा का एक नाम सोम भी है। चंद्रमा द्वारा स्थापित शिवलिंग होने से ये सोमनाथ कहलाए। इसे संसार का पहला ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
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समुद्र नहीं लाघंता अपनी मर्यादा
सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में अरब सागर के किनारे पर स्थापित है। महासागर के इतने नजदीक होने के बावजूद भी आज तक समुद्र का पानी गर्भगृह तक नहीं आया। लोग इसे एक चमत्कार ही मानते हैं। विद्वानों का मानना है कि महादेव की कृपा से समुद्र कभी अपनी मर्यादा नहीं लांघ पाता। आज तक ये बात एक रहस्य बनी हुई है।
दक्षिण दिशा में दूर-दूर तक जमीन नहीं
सोमनाथ मंदिर के पास ही बाण स्तंभ स्थापित है जिस पर संस्कृत में लिखा है आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव पर्यंत अबाधित ज्योतिरमार्ग और यही बात दूसरी ओर अंग्रेजी में भी लिखी है। इसका अर्थ है इस बिंदु से साउथ पोल तक सीधी रेखा में कोई अवरोध नहीं है। ये बात बिल्कुल सही भी है सोमनाथ से दक्षिण दिशा में लगभग 6000 किमी तक कोई भूमि नहीं आती।
द्वार को लेकर मतभेद
कहते हैं कि जब मोहम्मद गजनबी ने सोमनाथ मंदिर को लूटा तो वो यहां से मंदिर के चंदन द्वार लूटकर अपने साथ अफगानिस्तान ले गया। ऐसा कहते हैं कि 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयास से दरवाजे पुन: भारत लाए गए थे लेकिन कुछ लोग इस बात को सही नहीं मानते है। सोमनाथ मंदिर के द्वारों को लेकर और भी कईं मत प्रचलित हैं।
7 या 17 कितनी बार टूटा मंदिर?
सोमनाथ मंदिर के टूटने को लेकर भी अलग-अलग मत है। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि सोमनाथ मंदिर 7 बार विदेश आक्रांताओं द्वारा तोड़ा गया वहीं कुछ का कहना है कि 17 बार इस मंदिर को ध्वस्त किया गया है। मंदिर तोड़ने की पहली घटना 725 ईसवी में हुई थी। तब सिंध के सूबेदार अल जुनैद ने अरब स्तता का विस्तार करने के उद्देश्य से ये मंदिर तोड़ा था।
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