धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। जानिए उनके सामने कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं।
Pralhad Joshi New Education Minister: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के लंबे विरोध-प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने रविवार को सबसे पहले मंत्रालय से जुड़ी समीक्षा बैठक की। हालांकि, शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ वह अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी संभालते रहेंगे। ऐसे में उनके सामने कई अहम चुनौतियां होंगी, जिनका असर देश की शिक्षा व्यवस्था और लाखों छात्रों पर पड़ेगा।
1. NTA और परीक्षा प्रणाली में सुधार सबसे बड़ी चुनौती
प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे पहली और बड़ी जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार करना होगी। हाल के विवादों के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। ऐसे में एजेंसी की कार्यप्रणाली को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाना जरूरी होगा। इसके अलावा, पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, बेहतर निगरानी और प्रशासनिक सुधार लागू करने की चुनौती भी उनके सामने होगी। साथ ही, NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं का निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
2. छात्रों का भरोसा दोबारा जीतना
पिछले कुछ समय में परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे की कमी देखने को मिली है। देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद नई जिम्मेदारी संभाल रहे प्रह्लाद जोशी के लिए सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास फिर से कायम करना होगी। इसके लिए उन्हें परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

3. नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को प्रभावी तरीके से लागू करना
प्रह्लाद जोशी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन की रफ्तार भी बनाए रखनी होगी। नीति के विभिन्न प्रावधानों को राज्यों, विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों के सहयोग से जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा।
4. CBSE, NCERT और शिक्षा प्रशासन में सुधार
शिक्षा मंत्रालय के सामने पाठ्यक्रम और प्रशासनिक सुधार भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। प्रह्लाद जोशी को CBSE और NCERT के पाठ्यक्रम में समय के अनुरूप जरूरी बदलावों पर काम करना होगा। साथ ही मंत्रालय के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत बनाते हुए लंबे समय से लंबित सुधारों को आगे बढ़ाना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।

5. कई मंत्रालयों की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन
प्रह्लाद जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती इन सभी मंत्रालयों के कामकाज के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी, ताकि किसी भी विभाग के काम पर असर न पड़े।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और केंद्र सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं। वर्तमान में वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। इससे पहले वह कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।


