पुणे में मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। असम CM हिमन्त बिश्व शर्मा ने राहुल पर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया और महिला अधिकारों व UCC को लेकर कई सवाल खड़े किए।
पुणे में छात्राओं के बीच राहुल गांधी की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणी ने सियासी बहस को फिर हवा दे दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान और अधिकारों की बात करते हुए मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाया। इसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और उनके बयान को हिंदू धर्म को निशाना बनाने से जोड़ दिया।
राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्र पहचान पर क्या कहा?
पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की पहचान उनके पिता, पति या बेटे के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में पुरुष रिश्तेदारों के अधीन रखने वाले कथित नियम का जिक्र करते हुए इसे शर्मनाक बताया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत की ताकत उसकी करोड़ों महिलाओं के अलग-अलग अनुभवों, कल्पनाओं और सपनों में है। उनके मुताबिक महिलाओं को स्वतंत्र अस्तित्व और अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ने का अधिकार होना चाहिए।
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हिमन्त बिश्व शर्मा ने राहुल पर साधा निशाना
राहुल गांधी की टिप्पणी पर असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिला अधिकारों की वकालत की आड़ में हिंदू धर्म को बदनाम कर रहे हैं। सरमा ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी ने इस्लामी कानूनों के तहत मौजूद पितृसत्तात्मक प्रथाओं के खिलाफ इसी तरह मुखर होकर कितनी बार आवाज उठाई है। उन्होंने मनुस्मृति और हिंदू धर्म के संबंध को लेकर भी तर्क दिया कि इसे हिंदू धर्म की सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी धार्मिक संहिता नहीं माना जाता।
शाह बानो से UCC तक कांग्रेस पर हमला
असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के महिला अधिकारों के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने शाह बानो मामले के बाद हुए राजनीतिक फैसलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया। सरमा ने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाया। साथ ही राहुल गांधी को समान नागरिक संहिता यानी UCC पर स्पष्ट रुख बताने की चुनौती दी। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस धर्म से परे समान अधिकारों की गारंटी देने वाली समान नागरिक संहिता का समर्थन करेगी।
मनुस्मृति पर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
राहुल गांधी और हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों से साफ है कि मनुस्मृति का मुद्दा अब केवल महिलाओं के अधिकारों की बहस तक सीमित नहीं रहा। यह हिंदू धर्म, सामाजिक सुधार, महिला समानता और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों से जुड़ी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में इस बयान को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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