राम मंदिर दान विवाद में गिरफ्तार लवकुश मिश्रा की संपत्ति जांच के घेरे में है। जांच में प्लॉट खरीद, मकान निर्माण और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल लवकुश मिश्रा की संपत्ति अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। जांच के दौरान सामने आया है कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने के कुछ समय बाद ही उन्होंने एक प्लॉट खरीदा और उस पर लाखों रुपये खर्च कर दो मंजिला मकान बनवाना शुरू कर दिया। जांच एजेंसियां अब उनके वित्तीय लेन-देन, संपत्ति खरीद और आय के स्रोतों की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि ये खर्च उनके बतौर कैश गिनती कर्मचारी से होने वाली इनकम की तुलना में काफी अधिक नजर आ रहे हैं।

पत्नी के नाम पर लवकुश ने कहां खरीदा प्लॉट?
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, यह प्लॉट लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदा गया था। यह खरीद उस समय हुई थी, जब मिश्रा को राम मंदिर में दान गिनने वाली टीम से जुड़े हुए लगभग एक साल ही हुआ था। यह प्लॉट अयोध्या-लखनऊ हाईवे के पास शहादतगंज-बनबीरपुर इलाके में स्थित है। दस्तावेजों में इसकी कीमत 8.8 लाख रुपये दर्ज है। हालांकि, स्थानीय जानकारी के मुताबिक जमीन और उस पर बन रहे मकान की मौजूदा बाजार कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी जा रही है।
दो मंजिला मकान का निर्माण भी शुरू कराया
करीब 1,000 वर्ग फुट के इस प्लॉट पर दो मंजिला मकान बनाया जा रहा है। मकान का ढांचा लगभग तैयार हो चुका है और उसमें बिजली से जुड़ा काम भी चल रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य पिछले साल फरवरी में शुरू हुआ था और शुरुआती दिनों में लवकुश मिश्रा तथा उनका परिवार अक्सर निर्माण स्थल पर आता-जाता था।
पड़ोसियों ने क्या बताया?
पड़ोसी राजकुमार पांडे ने बताया कि यह मकान लवकुश मिश्रा का है और निर्माण कार्य पिछले साल फरवरी के आसपास शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, हम उन्हें समय-समय पर यहां आते-जाते देखते थे।" स्थानीय लोगों के मुताबिक, मकान निर्माण शुरू होने से पहले भूमि पूजन भी किया गया था, जिसमें मिश्रा और उनका परिवार शामिल हुआ था।
गिरफ्तारी के बाद अचानक रुका निर्माण कार्य
इलाके के लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक निर्माण स्थल पर मजदूर काम कर रहे थे। लेकिन जैसे ही राम मंदिर दान विवाद और लवकुश मिश्रा की गिरफ्तारी की खबर सामने आई, निर्माण कार्य अचानक बंद हो गया। एक स्थानीय निवासी ने बताया, "कुछ दिन पहले तक यहां मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन रविवार के बाद से न तो कोई मजदूर दिखाई दिया और न ही परिवार का कोई सदस्य यहां आया।"
सैलरी और संपत्ति को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, लवकुश मिश्रा का परिवार सामान्य जीवनशैली जीता था। वे अक्सर मोटरसाइकिल से आते-जाते थे और उनके रहन-सहन से कभी ऐसा नहीं लगा कि उनके पास इतनी बड़ी संपत्ति हो सकती है। खबरों के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कैश गिनती कर्मचारी के तौर पर उन्हें हर महीने लगभग 12,000 से 15,000 रुपये वेतन मिलता था। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "उनके रहन-सहन से कभी नहीं लगा कि उनके पास इतना पैसा होगा। इतना बड़ा घर कैसे बन रहा था, इसका जवाब जांच में ही सामने आएगा।"
घर से मिले थे लाखों रुपये
27 वर्षीय लवकुश मिश्रा मंदिर में चढ़ावे और नकद राशि की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा थे। पुलिस ने उन्हें अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया है। हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने उनके घर से करीब 12 लाख रुपये नकद बरामद किए थे।
क्या है राम मंदिर दान विवाद?
हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कम से कम 7 करोड़ रुपये नकद और गहनों का कथित गबन किया गया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह रकम इससे भी अधिक हो सकती है। मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है। अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच के दौरान करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में भी कई बड़े बदलाव हुए हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। फिलहाल, पुलिस और SIT वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्ति, बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।


