Ratna Singh Contempt Case: जज पर पोस्ट से बढ़ीं मुश्किलें, अब हाई कोर्ट में क्या होगा?
Ratna Singh Contempt Case: CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के खिलाफ क्रिमिनल अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति मिली है। जानिए साकेत कोर्ट के जज पर उनकी पोस्ट में क्या कहा गया और दिल्ली हाई कोर्ट अब क्या तय करेगा।

Delhi High Court: रत्ना सिंह के खिलाफ क्रिमिनल अवमानना की कार्यवाही को मंजूरी
Ratna Singh Contempt Case: दिल्ली में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली सरकार के वकील ने उनके खिलाफ क्रिमिनल अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी है। मामला साकेत कोर्ट के एक न्यायिक अधिकारी पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। अब दिल्ली हाई कोर्ट इस पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगा।

Ratna Singh Contempt Case: कौन हैं रत्ना सिंह और क्या है पूरा मामला?
- रत्ना सिंह 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की लीगल हेड हैं।
- मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनकी पोस्ट से जुड़ा है।
- उन्होंने साकेत कोर्ट के CJM अभिनव पांडे के एक आदेश पर सवाल उठाए थे।
- यह आदेश दिल्ली पुलिस की हिरासत से जुड़ी कार्यवाही के दौरान दिया गया था।
Delhi High Court: जज पर पोस्ट में क्या लिखा था?
- रत्ना सिंह ने न्यायिक अधिकारी के आदेश पर असंतोष जताया था।
- दिल्ली सरकार के वकील अमोल सिन्हा के मुताबिक, पोस्ट में केवल आदेश की आलोचना नहीं थी।
- उनकी टिप्पणी से पहली नजर में ऐसा प्रतीत हुआ कि न्यायिक अधिकारी किसी बाहरी व्यक्ति या संस्था के निर्देश पर काम कर रहे हैं।
- वकील ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाला बताया।
Criminal Contempt: रत्ना सिंह के खिलाफ कब और किसने की शिकायत?
- अधिवक्ता कौशिक चटर्जी ने 14 अक्टूबर को पत्र देकर अवमानना कार्यवाही की मांग की थी।
- 28 अक्टूबर को उन्होंने अतिरिक्त आवेदन भी दिया।
- इसके बाद दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अमोल सिन्हा ने 2 नवंबर के पत्र में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट की धारा 15(2) के तहत कार्यवाही शुरू करने की सहमति दी।
- हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है।
Contempt of Court Act: अब रत्ना सिंह के मामले में क्या होगा?
- दिल्ली सरकार के वकील की सहमति के बाद अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।
- दिल्ली हाई कोर्ट स्वतंत्र रूप से जांच करेगा कि पोस्ट न्यायिक अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं या नहीं।
- अमोल सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों की कड़ी आलोचना मात्र से क्रिमिनल अवमानना नहीं बनती।
- रत्ना सिंह के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।
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