Supreme Court: दिल्ली प्रोटेस्ट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि कोई भी अनिश्चितकाल तक सार्वजनिक जगह पर कब्जा नहीं कर सकता। त्योहारी सीजन में व्यापारियों के नुकसान और प्रदर्शन के अधिकारों पर SC ने केंद्र को नोटिस जारी किया है।
Supreme Court Protest Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि हर किसी को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कोई भी समूह अनिश्चितकाल तक किसी सार्वजनिक जगह पर कब्जा नहीं कर सकता। इस मामले में व्यापारियों ने त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने की शिकायत भी की।
Supreme Court on Protest: प्रदर्शन के अधिकार पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए एक निश्चित समय और व्यवस्था होनी चाहिए।
- CJI ने कहा कि किसी एक संगठन को अनिश्चित समय तक किसी खास जगह पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि एक समूह को हमेशा के लिए जगह दे दी जाए तो किसान, पत्रकार और दूसरे संगठन कहां प्रदर्शन करेंगे?
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जंतर-मंतर को सार्वजनिक सड़क बताते हुए अनिश्चितकालीन प्रदर्शन पर आपत्ति जताई।
Delhi Protest: व्यापारियों ने बताई कारोबार की परेशानी
- व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में दुकानें बंद रहीं।
- उन्होंने त्योहारों के मौसम में बिक्री प्रभावित होने और कारोबारियों को नुकसान पहुंचने की बात कही।
- रोहतगी ने कोर्ट से प्रदर्शन और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने के लिए नई व्यवस्था पर विचार करने की मांग की।
- CJI ने प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया, ताकि उनका पक्ष सुना जा सके।
Delhi Police Action: BNSS की धारा 163 पर भी सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई के लिए BNSS की धारा 163 के तहत जारी आदेश रिकॉर्ड पर रखे जाने चाहिए। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र से ये आदेश पेश करने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।






