India Russia Aviation Cooperation: रशियन हेलिकॉप्टर्स ग्रुप के मैक्सिम एंड्रियानोव ने आपदा राहत पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स में भारत के नेतृत्व की तारीफ की है। उन्होंने भारत-रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे विमानन क्षेत्र में सहयोग और IL-114 व SJ-100 जैसे विमानों के निर्माण में संभावित साझेदारी का भी जिक्र किया।

India-Russia relations: रशियन हेलिकॉप्टर्स ग्रुप के इंटरनेशनल मार्केटिंग मैनेजर मैक्सिम एंड्रियानोव ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स (BRICS) में भारत के नेतृत्व ने आपदा राहत में सहयोग पर चर्चा को आगे बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच सिविल एविएशन और हेलिकॉप्टर सेक्टर में लंबे समय से मजबूत साझेदारी रही है।

ब्रिक्स में आपदा राहत पर सहयोग

ANI से बात करते हुए एंड्रियानोव ने बताया कि ब्रिक्स एविएशन वर्किंग ग्रुप ने एक आपदा राहत तंत्र (Disaster Relief Mechanism) के प्रस्ताव पर चर्चा की थी। यह तंत्र सदस्य देशों को जंगलों में लगी आग और दूसरी आपदाओं से निपटने में मदद कर सकता है।

एंड्रियानोव ने कहा, "मैं इसे लेकर काफी पॉजिटिव हूं। एविएशन वर्किंग ग्रुप के साथ काम करना बहुत दिलचस्प रहा। हमने पूरे ब्रिक्स समूह के लिए एक आपदा राहत अथॉरिटी का नया प्रोजेक्ट पेश किया है। यह एक अंतर-सरकारी संगठन जैसा होगा जो देशों को जंगल की आग या दूसरी आपदाओं से लड़ने और लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में मदद करेगा।"

उन्होंने बताया कि भारत ने इस पहल का समर्थन किया था, हालांकि इस साल इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। उन्होंने कहा, "भारत ने हमारी पहल का समर्थन किया, भले ही हम इस साल कुछ ठोस कदम उठाने में नाकाम रहे, लेकिन फिर भी हमने इस आइडिया के साथ प्रगति की है।"

भारत-रूस की पुरानी विमानन साझेदारी

भारत-रूस विमानन सहयोग पर एंड्रियानोव ने कहा कि भारत पारंपरिक रूप से रूस का एक बड़ा पार्टनर रहा है। इस सहयोग में फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के साथ-साथ हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं।

उन्होंने आगे कहा, "भारत पारंपरिक रूप से इस क्षेत्र में हमारा बड़ा साझेदार रहा है। आपने फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के बारे में खबरें सुनी होंगी, भारत में हवाई जहाज असेंबली के कुछ प्रोजेक्ट्स हैं। हेलिकॉप्टर को लेकर भी भारत में सप्लाई और मेंटेनेंस दोनों से जुड़े हमारे कई प्रोजेक्ट्स हैं। इसलिए, भारत सालों से हमारा पारंपरिक पार्टनर रहा है, और मुझे नहीं लगता कि अगले कई सालों में इसमें कोई बदलाव आएगा।"

एंड्रियानोव ने कहा कि यह साझेदारी कई सालों में विकसित हुई है और दोनों देशों के लिए फायदेमंद बनी हुई है। उन्होंने कहा, "यह कई सालों का मजबूत और फायदेमंद सहयोग है, जो हमारी हेलिकॉप्टर ऑपरेट करने वाली भारतीय कंपनियों और रूस दोनों के लिए फायदेमंद है।"

दूरदराज के इलाकों के लिए हेलिकॉप्टर की क्षमता

उन्होंने दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद करने और यात्री कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में हेलिकॉप्टरों की क्षमता पर भी जोर दिया। एंड्रियानोव ने कहा, "मैं कहूंगा कि दूरदराज के इलाकों में यात्रियों को पहुंचाना एक अहम क्षेत्र है। क्योंकि हमारे दोनों देशों का क्षेत्र बहुत बड़ा है, और यहां बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहर भी हैं जो मुश्किल इलाकों में हो सकते हैं। हेलिकॉप्टर ट्रांसपोर्ट उन इलाकों के लिए एक समाधान है।"

उन्होंने रूस में चल रहे एक ऐसे ही कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जहां सरकारी मदद से गांवों और बड़े शहरों के बीच हेलिकॉप्टर कनेक्टिविटी मुमकिन हो पाती है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अगर यह कार्यक्रम बड़ा होता है, इसमें ज्यादा लोग शामिल होते हैं, तो इससे देश की समृद्धि बढ़ेगी और लोगों को खुद को विकसित करने में मदद मिलेगी।"

हेलिकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज (EMS)

एंड्रियानोव ने हेलिकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज (EMS) को एक और ऐसा क्षेत्र बताया जहां सहयोग और हेलिकॉप्टरों का ज्यादा इस्तेमाल दूरदराज के इलाकों में लोगों को फायदा पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा, "दूसरी चीज है हेलिकॉप्टर ईएमएस। आप हर छोटे शहर या गांव में अस्पताल नहीं बना सकते, लेकिन छोटे गांव में रहने वाले व्यक्ति के भी वही अधिकार हैं। वह भी टैक्स देता है। इसलिए सरकार को अपने हर नागरिक की परवाह करनी चाहिए।"

उन्होंने बताया कि रूस के हेलिकॉप्टर ईएमएस कार्यक्रम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच मिले, चाहे वे कहीं भी रहते हों। एंड्रियानोव ने कहा, "रूस में हमारा एक हेलिकॉप्टर ईएमएस कार्यक्रम है, जहां सरकार हर नागरिक को, चाहे वह बड़े शहर में रहता हो या छोटे शहर में, उचित स्तर की स्वास्थ्य सेवा मिलने की गारंटी देती है।"

सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अपील

उन्होंने भारत और रूस के बीच ज्यादा से ज्यादा सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भी अपील की। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग के साथ-साथ लोगों के बीच आपसी संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। एंड्रियानोव ने कहा, "और तीसरी बात, मैं कहूंगा कि कुछ सांस्कृतिक आदान-प्रदान होना चाहिए, क्योंकि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां जीवन बहुत तेज हो गया है। इसलिए, हमें अपने देशों के बीच एक बड़ा सांस्कृतिक आदान-प्रदान स्थापित करने की जरूरत है।"

भारत यात्रा के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने भारतीय संस्कृति को समझने के लिए म्यूजियम का दौरा किया। उन्होंने कहा, "मैं सोमवार से यहां हूं। और इसमें से दो दिन मैंने कुछ म्यूजियम देखे, ताकि भारतीय संस्कृति की कुछ झलक अपने साथ घर ले जा सकूं।"

विमानों के जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग पर बातचीत

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और रूस ने मिलकर इल्यूशिन Il-114-300 टर्बोप्रॉप और सुखोई सुपरजेट 100 (SJ-100) विमान बनाने के लिए अपनी द्विपक्षीय बातचीत का दायरा काफी बढ़ा दिया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस के बीच भारत में विमान निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा हुई।

इससे पहले, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने कहा था कि भारत और रूस ने देश में विमानों के निर्माण पर चर्चा का विस्तार किया है, जिसमें टर्बोप्रॉप IL-114 और सुखोई सुपरजेट 100 विमान शामिल हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले पत्रकारों से बात करते हुए नायडू ने कहा था कि ये विमान भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जरूरतों के अनुकूल हैं, खासकर जब देश भर में कई हवाई अड्डे विकसित किए जा रहे हैं। (ANI)