रूस की नई परमाणु मिसाइल RS-28 सरमत (शैतान 2) जल्द तैनात होगी। पुतिन ने इसे 35,000 km रेंज वाली दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल बताया है। यह डिफेंस सिस्टम को भेदकर एक साथ कई ठिकानों पर परमाणु हमला करने में सक्षम है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को मॉस्को में एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि रूस की सबसे ताकतवर और नई परमाणु मिसाइल, RS-28 सरमत, इस साल के आखिर तक पूरी तरह तैयार हो जाएगी। पुतिन ने बड़े गर्व से कहा, 'यह दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल है।' यह मिसाइल कई सालों से बन रही थी, लेकिन अलग-अलग तकनीकी दिक्कतों और देरी की वजह से अब जाकर अपने आखिरी दौर में पहुंची है।

RS-28 सरमत मिसाइल को इस तरह बनाया गया है कि यह परमाणु बम लेकर अमेरिका और यूरोप समेत हजारों मील दूर किसी भी देश के टारगेट को निशाना बना सकती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह रूस के दुश्मनों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। पुतिन का दावा है कि इस मिसाइल की परमाणु ताकत पश्चिमी देशों की ऐसी मिसाइलों से चार गुना ज़्यादा है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि यह मिसाइल 35,000 किलोमीटर से ज़्यादा, यानी करीब 21,750 मील की दूरी तय कर सकती है। यह रेंज इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक बनाती है।
पुतिन ने कहा कि सरमत मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मौजूदा और भविष्य के सभी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है। इसका मतलब है कि दुश्मन के जो डिफेंस सिस्टम आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए बने हैं, वे भी इसे रोक नहीं पाएंगे। हालांकि, यह मिसाइल हमेशा कामयाब नहीं रही है। पश्चिमी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सितंबर 2024 में हुए एक टेस्ट में यह बुरी तरह फेल हो गई थी और लॉन्च वाली जगह पर ही एक बड़ा गड्ढा बन गया था।
पुरानी नाकामियों के बावजूद, रूस की सरकारी मीडिया ने बताया कि मिलिट्री कमांडर सर्गेई कराकायेव ने पुतिन को जानकारी दी है कि मंगलवार को हुआ सरमत मिसाइल का टेस्ट कामयाब रहा। कराकायेव ने कहा कि इस मिसाइल को सेना में शामिल करने से रूस की ज़मीनी परमाणु ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इससे देश की स्ट्रैटेजिक डिफेंस क्षमता भी मज़बूत होगी और दुश्मन रूस पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेंगे।
जब से रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया है, पुतिन लगातार दुनिया को अपनी परमाणु ताकत की याद दिलाते रहे हैं। हालांकि, पश्चिमी देशों का मानना है कि पुतिन ऐसे बयान इसलिए देते हैं ताकि दूसरे देश यूक्रेन की खुलकर मदद न करें। यह बिना सीधी लड़ाई के दुनिया को धमकाने का एक तरीका है।
पश्चिमी दुनिया में 'शैतान 2' (Satan 2) के डरावने नाम से जानी जाने वाली RS-28 सरमत, सोवियत ज़माने की करीब 40 पुरानी 'वोयवोदा' मिसाइलों की जगह लेगी। पुतिन का कहना है कि नई मिसाइल पुरानी वोयवोदा जितनी ही ताकतवर है, लेकिन टारगेट को भेदने में उससे कहीं ज़्यादा सटीक है। सरमत रूस के उस बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसके तहत भविष्य के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात देने वाले हथियार बनाए जा रहे हैं। 'अवांगार्ड' हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी एक ऐसा ही हथियार है, जो आवाज़ की रफ्तार से 27 गुना तेज़ी से उड़ सकता है। यह किसी भी आम जेट या प्लेन से बहुत ज़्यादा तेज़ है।
RS-28 सरमत का वज़न 100 टन से भी ज़्यादा है। इसे ज़मीन के नीचे बने साइलो (सुरक्षित गड्ढों) से लॉन्च किया जाता है ताकि यह सुरक्षित रहे और दुश्मन को चौंका सके। इसे मशहूर 'मकेयेव रॉकेट डिज़ाइन ब्यूरो' ने डिज़ाइन किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह MIRVs (मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स) ले जा सकती है। आसान भाषा में समझें तो एक ही मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग ठिकानों पर हमला कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरमत 10 भारी MIRVs, 16 हल्के MIRVs, या 24 हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स तक ले जाने में सक्षम है।
अपने विशाल आकार, लंबी रेंज और डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता के कारण, सरमत को दुनिया के लिए रूस का एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या यह सच में ग्लोबल पावर बैलेंस को बदल पाएगी या नहीं।
(लेखक गिरीश लिंगन्ना एक साइंस राइटर, डिफेंस, एयरोस्पेस और पॉलिटिकल एनालिस्ट हैं और बेंगलुरु में रहते हैं। वह जर्मनी की ADD इंजीनियरिंग GmbH की सब्सिडियरी, ADD इंजीनियरिंग कंपोनेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। )
