Russia Ukraine War को खत्म कराने में भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। कीव दौरे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जरूरत पड़ने पर मदद की पेशकश की। जानिए यूक्रेन में भारत के विदेश मंत्री ने क्या कहा और शांति वार्ता पर इसका क्या असर हो सकता है।

रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध ने दुनिया की कूटनीति के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खड़ी कर दी है। अब इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के बीच भारत ने एक बार फिर शांति स्थापित करने में मदद की पेशकश की है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में कहा कि अगर भारत किसी भी तरह से युद्ध समाप्त कराने में मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है। उनके इस बयान को भारत की संभावित मध्यस्थ भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

यूक्रेन के विदेश मंत्री के सामने दिया बयान

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के साथ बातचीत के दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि भारत जरूरत पड़ने पर मदद करने के लिए तैयार है। दोनों नेताओं के बीच ब्लैक सी यानी काला सागर में कमर्शियल शिपिंग पर हो रहे हमलों को लेकर भी चर्चा हुई। यह मुद्दा भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री तनाव का असर भारतीय नागरिकों और नाविकों पर भी पड़ चुका है।

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यूक्रेन दौरे पर क्यों पहुंचे जयशंकर?

विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य भारत-यूक्रेन संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय घटनाक्रम समेत आपसी हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। इस दौरे के दौरान उनकी यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत होनी है। भारत लगातार रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संवाद बनाए हुए है और पहले भी बातचीत तथा कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने की बात कहता रहा है।

चार साल से जारी युद्ध ने कितना नुकसान किया?

फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी भारी मानवीय और सैन्य नुकसान का कारण बना हुआ है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आकलनों में दोनों देशों के सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की संख्या बेहद अधिक बताई गई है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के आकलन के मुताबिक, युद्ध में दोनों पक्षों के लाखों सैनिक हताहत हुए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों में हजारों नागरिकों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने का उल्लेख किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत केवल शांति की अपील तक सीमित रहेगा या रूस और यूक्रेन के बीच संवाद की कोई सक्रिय भूमिका भी निभाएगा? जयशंकर का कीव से आया बयान इस बहस को एक बार फिर तेज कर सकता है।

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