विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 1985 के एयर इंडिया 'कनिष्क' विमान बम धमाके की 41वीं बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इस भयावह घटना में मारे गए 329 लोगों को याद करते हुए आतंकवाद के हर रूप से लड़ने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 'कनिष्क' पर हुए बम हमले की 41वीं बरसी पर पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने साफ किया कि भारत हर तरह के आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जयशंकर ने लिखा कि नई दिल्ली आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में दृढ़ है। उन्होंने कहा, "आज, एयर इंडिया 182 'कनिष्क' बमबारी की 41वीं बरसी पर, हम उन लोगों की याद को सम्मान देते हैं जिन्होंने इस भयावह आतंकी घटना में अपनी कीमती जानें गंवाईं। हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।"

1985 का वो भयानक आतंकी हमला

23 जून, 1985 को हवा में हुआ यह धमाका, दुनिया के विमानन इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक है। इसकी भयावहता की तुलना 2001 के 9/11 हमलों से की जाती है। यह बोइंग 747 विमान मॉन्ट्रियल-लंदन-दिल्ली रूट पर था। कनाडा स्थित खालिस्तानी आतंकी समूह बब्बर खालसा ने इसे 9,400 मीटर की ऊंचाई पर उड़ा दिया था। इस हमले में विमान में सवार सभी 329 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी। यह विनाशकारी धमाका तब हुआ जब विमान अटलांटिक महासागर के ऊपर, आयरिश हवाई क्षेत्र में था।

हर साल दी जाती है श्रद्धांजलि

यह घटना कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक हत्या थी, जिसमें 268 कनाडाई नागरिकों और 24 भारतीय नागरिकों सहित 329 लोगों की जान चली गई थी। उनकी याद में, ओटावा में भारत का उच्चायोग और टोरंटो और वैंकूवर में भारत के महावाणिज्य दूतावास हर साल 23 जून को मृतकों के परिवारों और भारतीय प्रवासियों के साथ मिलकर श्रद्धांजलि देते हैं। ये कार्यक्रम ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में एक साथ होते हैं।

चार दशक से भी ज़्यादा समय बाद, भारत, कनाडा और आयरलैंड आज भी उस हवाई त्रासदी का गहरा दुख साझा करते हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया था और दुनिया भर में हवाई सुरक्षा के मानकों को हमेशा के लिए बदल दिया।