AAP से BJP में गए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक पर पंजाब में 2 FIR के बाद गिरफ्तारी की आशंका बढ़ी। दिल्ली स्थित सरकारी आवास से अचानक निकलने, फोन बंद होने और अज्ञात स्थान पर जाने की खबर से सस्पेंस गहरा गया। AAP-BJP दलबदल विवाद और दलबदल विरोधी कानून के बीच राजनीतिक हलचल तेज।
नई दिल्ली/चंडीगढ़: राज्यसभा की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब AAP से अलग होकर BJP में शामिल हुए सांसद संदीप पाठक को लेकर गिरफ्तारी की आशंका सामने आने लगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में उनके खिलाफ दो FIR दर्ज होने के बाद यह मामला अचानक गंभीर मोड़ लेता दिख रहा है।
सरकारी आवास से अचानक गायब हुए संदीप पाठक
सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को संदीप पाठक अपने नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास से अचानक निकल गए। बताया जा रहा है कि जैसे ही उनके खिलाफ पंजाब में दर्ज मामलों को लेकर कानूनी कार्रवाई तेज हुई, वैसे ही सुरक्षा व्यवस्था भी उनके आवास पर बढ़ा दी गई। एक वायरल वीडियो में उन्हें अपने आवास के पिछले दरवाजे से बाहर निकलते, गाड़ी में बैठते और तेज़ी से रवाना होते हुए देखा गया है। इस दौरान इलाके में भारी सुरक्षा तैनात की गई थी।
फोन बंद, लोकेशन अज्ञात-राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस
रिपोर्ट्स के अनुसार, संदीप पाठक का मोबाइल फोन बंद आ रहा है और उनका वर्तमान लोकेशन स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि वे किसी “अज्ञात स्थान” पर चले गए हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि BJP की कानूनी टीम इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और संभावित कानूनी रणनीति तैयार की जा रही है।
पंजाब में FIR और गैर-जमानती धाराओं का मामला
IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में उनके खिलाफ दर्ज दो FIR में गैर-जमानती अपराधों की धाराएं शामिल हैं। इसी कारण उनकी गिरफ्तारी की संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक पुलिस या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच की दिशा तेज मानी जा रही है।
AAP से BJP तक का राजनीतिक सफर और बड़ा दल-बदल
संदीप पाठक उन सात AAP राज्यसभा सांसदों में शामिल थे, जिन्होंने हाल ही में पार्टी छोड़कर BJP का दामन थामा था। यह कदम राजनीतिक रूप से काफी बड़ा माना गया था क्योंकि इससे उच्च सदन में समीकरण बदल गए थे। इनमें से अधिकतर सांसद पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे। हालांकि, दलबदल विरोधी कानून की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता पर तत्काल खतरा नहीं माना जा रहा है, क्योंकि यह संख्या दो-तिहाई के करीब पहुंच चुकी थी।
आगे क्या? राजनीतिक और कानूनी मोड़ पर नजर
अब पूरा मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बेहद संवेदनशील बन गया है। अगर गिरफ्तारी होती है, तो यह मामला न सिर्फ पंजाब बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा असर डाल सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि संदीप पाठक आगे सामने आते हैं या यह मामला और गहराता है।


