वैज्ञानिकों ने मिल्की वे के केंद्र के पास 'एरिथ्रुलोस' नामक एक जटिल चीनी खोजी है। यह जीवन के लिए आवश्यक DNA और RNA का आधार है। यह खोज संकेत देती है कि जीवन के निर्माण खंड अंतरिक्ष से पृथ्वी पर आए हो सकते हैं।

ब्रह्मांड की गहराइयों में जीवन की तलाश कर रहे वैज्ञानिकों के हाथ एक बहुत ही रोमांचक और हैरान करने वाली चीज़ लगी है। अंतरिक्ष में तैरती मिली यह चीज़ जीवन की उत्पत्ति से जुड़ी एक अहम कड़ी हो सकती है। खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा, यानी मिल्की वे, के केंद्र के पास मौजूद "G+0.693−0.027" नाम के एक विशाल मॉलिक्यूलर क्लाउड (आणविक बादल) में चीनी के मॉलिक्यूल खोजे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह 'एरिथ्रुलोस' (Erythrulose) नाम की एक प्राकृतिक चीनी है, जो धरती पर रास्पबेरी और फेक टैन प्रोडक्ट्स में पाई जाती है। वैज्ञानिकों ने बेहद संवेदनशील रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके पहली बार इंटरस्टेलर स्पेस में इतनी जटिल कार्बन शुगर का पता लगाया है।

ब्रह्मांड की गहराइयों में मिली 'मीठी' चीज़!

वैज्ञानिकों ने हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के केंद्र के पास "G+0.693−0.027" नाम के एक विशाल मॉलिक्यूलर क्लाउड में इस शुगर का पता लगाया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह 'एरिथ्रुलोस' (Erythrulose) नाम की वही प्राकृतिक चीनी है, जो धरती पर रास्पबेरी (Raspberries) और आर्टिफिशियल सनटैन (Fake Tan) प्रोडक्ट्स में मिलती है।

वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि उन्होंने बेहद पावरफुल रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके पहली बार इंटरस्टेलर मीडियम (तारों के बीच की जगह) में इतने कॉम्प्लेक्स कार्बन शुगर को खोजा है।

एलियन की खोज में यह एक बड़ा मोड़ क्यों है?

  • जीवन का आधार: चीनी सिर्फ खाने की चीज़ नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर में मौजूद DNA और RNA की रीढ़ की हड्डी होती है। जीवन की शुरुआत और जैविक प्रक्रियाओं के लिए शुगर मॉलिक्यूल बेहद ज़रूरी हैं।
  • पुरानी थ्योरी को चुनौती: एस्ट्रोकेमिस्ट्री की पुरानी थ्योरी कहती थी कि अंतरिक्ष में मॉलिक्यूल एक-एक कार्बन एटम जोड़कर धीरे-धीरे बड़े होते हैं। लेकिन एरिथ्रुलोस में चार कार्बन एटम होते हैं। इसका मिलना वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज है।
  • अंतरिक्ष से धरती पर आई चीनी: वैज्ञानिकों का अनुमान है कि करीब 4 अरब साल पहले, जब धरती पर धूमकेतुओं और उल्कापिंडों की भारी बारिश हुई थी (जिसे Late Heavy Bombardment कहते हैं), तब करीब 50 लाख से 5 करोड़ टन तक यह चीनी धरती पर पहुंची होगी। हो सकता है कि इसी ने धरती पर पहली बार जीवन पनपने में मदद की हो।