SEBI ने 'बॉस स्कैम' से आगाह किया है। इसमें धोखेबाज़ CEO बनकर कर्मचारियों से पैसे मांगते हैं, जिसके लिए वे AI वॉयस क्लोनिंग और WhatsApp हैकिंग का इस्तेमाल करते हैं। पैसे भेजने से पहले फोन पर पुष्टि करें। धोखाधड़ी पर 1930 पर कॉल करें।
साइबर क्रिमिनल्स यानी ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले लोग ठगी के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं। अब सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने भारत की कॉर्पोरेट कंपनियों के फाइनेंस डिपार्टमेंट में काम करने वाले कर्मचारियों को एक नए तरह के फ्रॉड से सावधान रहने को कहा है। इस स्कैम में धोखेबाज़, कंपनी के CEO या मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बनकर कर्मचारियों को अर्जेंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। इस फ्रॉड को 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) या 'सीईओ इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' कहा जाता है। SEBI ने पाया है कि कई कर्मचारी इन फर्जी निर्देशों पर भरोसा करके पैसे गंवा चुके हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने जब ऐसे मामलों में बढ़ोतरी देखी, तो SEBI ने लिस्टेड कंपनियों और अपने तहत आने वाले संस्थानों के लिए यह चेतावनी जारी की।
कैसे होता है 'बॉस स्कैम'?
साइबर क्रिमिनल्स मुख्य रूप से दो तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
1. AI का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान बनाना
धोखेबाज़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आवाज की नकल (वॉयस क्लोनिंग), डीपफेक वीडियो कॉल और फर्जी सोशल मीडिया ग्रुप बनाते हैं। इसके जरिए वे कंपनी के बॉस की तरह दिखने और बोलने का नाटक करते हैं। जब कर्मचारी को यकीन हो जाता है कि वह असली CEO या MD से बात कर रहा है, तो उसे एक खास बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है। कई बार इस ट्रांजैक्शन को सीक्रेट रखने के लिए भी कहा जाता है। इसके लिए वे कहते हैं कि यह सौदा कंपनी की खुफिया जानकारी (UPSI) से जुड़ा है, ताकि कर्मचारी किसी और से इसे कन्फर्म न कर सके।
2. WhatsApp अकाउंट हैक करने के लिए मैलवेयर अटैक
दूसरे तरीके में, धोखेबाज़ WhatsApp पर एक कंप्रेस्ड .zip फाइल भेजते हैं। इस फाइल में खतरनाक एक्जीक्यूटेबल फाइलें और डायनेमिक लिंक लाइब्रेरी (DLL) फाइलें छिपी होती हैं। जैसे ही कोई इसे विंडोज कंप्यूटर पर खोलता है, एक मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है। इससे धोखेबाज़ों को आपके एक्टिव WhatsApp वेब सेशन का कंट्रोल मिल जाता है। फाइनेंस डिपार्टमेंट के किसी अधिकारी का WhatsApp अकाउंट कंट्रोल में आने के बाद, वे दूसरे कर्मचारियों को पैसे ट्रांसफर करने के फर्जी निर्देश भेज सकते हैं। SEBI ने बताया कि कुछ मामलों में धोखेबाज़ पूरे कंप्यूटर पर कब्जा कर लेते हैं और कॉन्टैक्ट लिस्ट में अपना फोन नंबर CEO के नाम से सेव करके फर्जी पेमेंट के निर्देश भेजते हैं।
कंपनियों और कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
- SEBI की सलाह है कि WhatsApp, ईमेल या सोशल मीडिया पर मिले किसी भी फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के निर्देश पर तुरंत अमल न करें।
- पैसे भेजने से पहले संबंधित CEO, MD या सीनियर अधिकारी को सीधे फोन करके यह पक्का कर लें कि निर्देश सही है या नहीं।
- सबसे बड़ी चेतावनी यह है कि मैसेजिंग ऐप्स पर मिले निर्देशों के आधार पर कभी भी पैसों का लेन-देन न करें, भले ही भेजने वाला कोई भी हो।
- कर्मचारियों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अनजान या अविश्वसनीय सोर्स से आई एक्जीक्यूटेबल फाइलें न खोलें।
- इस्तेमाल में न होने पर WhatsApp वेब सेशन से लॉग आउट करना भी आपकी सुरक्षा बढ़ा सकता है।
- धोखाधड़ी होने पर कहां शिकायत करें?
- अगर आप ऐसे किसी साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
- इसके अलावा, आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
SEBI का कहना है कि कंपनियों के कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली ऐसी धोखाधड़ी से बचने और पैसों का नुकसान रोकने का सबसे अच्छा तरीका सतर्क रहना है।
