जंतर-मंतर खाली कराने के महज 6 घंटे बाद आधी रात को ऐसा क्या हुआ कि भड़क उठा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन? जानिए आज फिर होने वाले संसद मार्च के पीछे का खौफनाक सच!

Jantar Mantar Protest: सोमवार की शाम 5 बजे तक दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर छावनी में तब्दील हो चुका था। दिल्ली पुलिस ने भारी बल प्रयोग कर पूरे प्रदर्शन स्थल को खाली करा दिया था और प्रदर्शनकारियों के मंच को उखाड़ फेंका था। प्रशासन को लगा कि आंदोलन थम गया, लेकिन असली सस्पेंस अभी बाकी था। ठीक 6 घंटे बाद, यानी सोमवार रात 11 बजे, जंतर-मंतर की खामोशी अचानक नारों की गूंज में बदल गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी भारी बारिश के बीच चुपके से वापस लौट आए। देखते ही देखते वहां दोबारा तंबू तन गए और एक कामचलाऊ मंच खड़ा कर दिया गया। रात के सन्नाटे में प्रदर्शनकारियों की यह वापसी प्रशासन के लिए एक बड़ी खुफिया नाकामी और हैरान कर देने वाली चुनौती बन गई।

पुलिस ने हटाया मंच, रात में फिर खड़ा हो गया आंदोलन

सोमवार शाम करीब पांच बजे संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल खाली करा दिया था। ऐसा लग रहा था कि दिनभर की हिंसक झड़पों के बाद आंदोलन की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। लेकिन रात करीब 11 बजे हालात बदल गए। प्रदर्शनकारी फिर लौटे, नया टेंट लगाया, अस्थायी मंच बनाया और आंदोलन को पहले से अधिक मजबूती के साथ जारी रखने का ऐलान कर दिया। जंतर-मंतर देर रात तक नारों और भाषणों से गूंजता रहा। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ।

अभिजीत दीपके का ऐलान-'संसद मार्च फिर होगा'

इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में अभिजीत दीपके ने कहा कि "हम जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे। संसद तक मार्च मंगलवार को भी होगा। जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा।" CJP की मुख्य मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही शामिल है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तीनों मांगें पूरी होने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

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क्या जेपी नड्डा से हुई सीक्रेट मुलाकातों में बात बिगड़ गई?

सड़कों पर मचे इस गदर के बीच परदे के पीछे का राजनीतिक घटनाक्रम और भी रहस्यमयी हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को ही CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से दो बार बेहद गोपनीय मुलाकातें कीं। पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई, जहां नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से उनकी मांगें लिखित में मांगी। इसके बाद शाम 4 बजे प्रतिनिधिमंडल ने तीन मांगों का एक लिखित ज्ञापन सौंपा। कयास लगाए जा रहे थे कि इस बातचीत के बाद आंदोलन शांत हो जाएगा और अभिजीत दिपके व तीन छात्रों ने अपना अनशन भी तोड़ दिया। लेकिन दूसरी तरफ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के बीच एक बेहद लंबी और बंद कमरे में बैठक हुई, जिसके विवरण को पूरी तरह गुप्त रखा गया है। सरकार की इस रहस्यमयी चुप्पी ने प्रदर्शनकारियों के भीतर अविश्वास को और बढ़ा दिया।

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सोनम वांगचुक का अनशन और दिल्ली हाईकोर्ट में आज होने वाला बड़ा फैसला

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सस्पेंस शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को लेकर बना हुआ है। 22 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को पुलिस ने बर्बरतापूर्वक हिरासत में लेकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया है। अस्पताल के बेड से भी वांगचुक ने अपना अनशन तोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने जानबूझकर लाठियां बरसाईं। अब हर किसी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो की याचिका पर आज फिर सुनवाई होनी है। कोर्ट ने वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट तलब की है, और आज आने वाला फैसला इस आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।

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अनशन टूटा, लेकिन आंदोलन नहीं

प्रदर्शन के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी रहा कि अभिजीत दीपके और 22 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे तीन अन्य छात्रों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है और मामले की अगली सुनवाई तय की है।

आज फिर मचेगी तबाही? आमने-सामने पुलिस और आक्रोशित युवा

सोमवार को हुए 'संसद चलो' मार्च में जो खूनी संघर्ष देखने को मिला, उसने दिल्ली को दहला दिया है। पत्थरबाजी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के बीच नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा और दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी और 50 से अधिक प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि 70 लोगों को हिरासत में लिया गया है। दिल्ली पुलिस अब CCTV फुटेज और मोबाइल वीडियो खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय या राजनीतिक साजिश थी। इंटरनेट सेवाएं अभी भी बाधित हैं, लेकिन इस खौफ के बीच अभिजीत दिपके ने मंच से दहाड़ते हुए ऐलान कर दिया है-"हम आज फिर संसद की तरफ मार्च करेंगे और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ेंगे।" इधर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर ने भी साफ कर दिया है कि बैरिकेड्स फिर से तैयार हैं, यानी आज दिल्ली की सड़कों पर एक और बड़े टकराव की जमीन तैयार हो चुकी है।

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