SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब है तो घबराएं नहीं! चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पहले से पंजीकृत मतदाता भी Form 6 भर सकते हैं। सिर्फ दोबारा आवेदन करने पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। जानिए क्या हैं शर्तें और कांग्रेस ने क्या कहा?
SIR Draft Voter List: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम गायब हैं, उनके लिए चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है। आयोग ने साफ किया है कि पहले से रजिस्टर्ड मतदाता भी अपना नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' भर सकते हैं और इसके लिए उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
फॉर्म 6 भरने पर क्यों थी कन्फ्यूजन और क्या है आयोग का निर्देश?
फॉर्म 6 में एक घोषणा-पत्र होता है जिसमें यह भरना पड़ता है कि आवेदक का नाम पहली बार सूची में आ रहा है।
- कानूनी डर का खात्मा: पहले से वोटर्स को डर था कि पुराना नाम होने के बावजूद यह फॉर्म भरना 'गलत घोषणा' माना जाएगा, जिससे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के के तहत कार्रवाई हो सकती है।
- EC का स्पष्ट निर्देश: चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के CEOs को निर्देश दिया है कि धारा 31 के तहत ऐसे किसी भी मतदाता पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
Form 6 Controversy: दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का भी हवाला
- आयोग ने निलोत्पल दत्ता मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया। कोर्ट ने पहले से पंजीकृत मतदाताओं की फॉर्म 6 को लेकर आशंकाओं को बेबुनियाद माना था।
- दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के तहत नाम दोबारा जुड़वाने के लिए यह फॉर्म बेझिझक भरा जा सकता है।
कांग्रेस का तीखा पलटवार: चुनाव आयोग के फैसले को बताया 'शब्दों का खेल'
चुनाव आयोग की इस सफाई के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
- शब्दों का मायाजाल: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि यह सिर्फ "शब्दों का खेल" है, जो एक दोषपूर्ण प्रक्रिया पर पर्दा डालने की कोशिश है।
- उत्पीड़न का आरोप: कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया ही ऐसी बनाई गई है जिससे वैध मतदाताओं के नाम सूची से कट जाएं और फिर उन्हें फॉर्म भरकर परेशान होना पड़े।






