19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को नियमित मेडिकल जांच और जरूरी इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
Sonam Wangchuk Hunger Strike Day 19: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार 19वें दिन भी जारी है। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि उनकी नियमित मेडिकल जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए। वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ चल रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद से अनशन पर बैठे हैं।
हर नागरिक की जान कीमती- कोर्ट
गुरुवार 16 जुलाई को सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए जो भी जरूरी मेडिकल सहायता हो, वह उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हर नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
याचिका में सेहत को लेकर जताई गई गंभीर चिंता
यह मामला बुधवार को दाखिल की गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया कि यदि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने जल्द अपना अनशन समाप्त नहीं किया, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने सरकार पर उनकी स्थिति को लेकर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाने का आरोप भी लगाया।
8.5 किलो वजन घटने का दावा, मेडिकल मदद की मांग
याचिका में बताया गया कि भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.5 किलो कम हो चुका है। इसमें सुझाव दिया गया कि यदि जरूरत पड़े तो उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक पोषण, विटामिन और मिनरल्स उपलब्ध कराए जाएं ताकि उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सके। याचिका में यह भी कहा गया कि सार्वजनिक स्थान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। साथ ही यह तर्क दिया गया कि यदि इस दौरान वांगचुक के साथ कोई गंभीर घटना होती है, तो इससे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश जाएगा।
सरकार से मेडिकल निगरानी पर कोर्ट ने किए सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि वांगचुक की मेडिकल निगरानी किस तरह की जा रही है। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि उनकी रोजाना स्वास्थ्य जांच की जा रही है, हालांकि हर बार सरकारी डॉक्टर ही जांच नहीं करते और कई बार निजी डॉक्टर भी इसमें शामिल होते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित और रोजाना मेडिकल जांच सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक उपचार किया जाए और जरूरत पड़ने पर तुरंत दवा व अन्य चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सोनम वांगचुक ने वीडियो संदेश जारी किया
कोर्ट के आदेश से कुछ घंटे पहले सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि लंबे अनशन के बावजूद उनकी स्थिति भूख हड़ताल के हिसाब से सामान्य है। उन्होंने बताया कि शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है और मांसपेशियां थक रही हैं, लेकिन उनका मनोबल मजबूत है।
अनशन खत्म करने से किया इनकार
वांगचुक ने कहा कि केवल अपील के आधार पर अनशन खत्म करना सही संदेश नहीं देगा। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों को उचित तरीके से आगे नहीं बढ़ाया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सोनम वांगचुक ने लोगों से 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले CJP के विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सांसदों तक पहुंचाना जरूरी है ताकि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार हो सके। उन्होंने स्कूल और कॉलेज के छात्रों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
क्या है CJP का आंदोलन?
अभिजीत दिपके के नेतृत्व में चल रहा CJP आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है। आंदोलन का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए प्रश्नपत्र लीक के मामलों, खासकर 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवादों को लेकर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।


