Puri Jagannath Rath Yatra:  भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा पुरी में शुरू हो गई है। लाखों भक्त इस भव्य आयोजन को देखने के लिए पहुुंच रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि रथ में सबसे पहले कौन बैठता है। आखिर में जगन्नाथ भगवान क्यों बैठते हैं।

पुरी (ओडिशा) : गुरुवार को पुरी का माहौल भक्ति और उत्साह से सराबोर है, क्योंकि यहां भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा शुरू हो गई है। 
लाखों श्रद्धालु ग्रैंड रोड (बड़दंडा) पर जमा हुए हैं, ताकि वे इस शानदार जुलूस को देख सकें और अपने आराध्य देवों की एक झलक पा सकें, जो अपने भव्य रथों पर सवार हो रहे हैं। 

पुरी की यात्रा में जगन्नाथ से पहले कौन बैठता?

एक बेहद खास और पारंपरिक रस्म 'पहांडी' के तहत, देवताओं को मंदिर के गर्भगृह से बाहर एक भव्य जुलूस में लाया जा रहा है। सदियों पुरानी परंपरा के मुताबिक, सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के अस्त्र, भगवान सुदर्शन को रथ तक लाया जाता है। उनके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और आखिर में ब्रह्मांड के स्वामी, भगवान जगन्नाथ को बाहर लाया जाता है। 

जगन्नाथ यात्रा में चलने वाले तीनों रथों के क्या है नाम

  • अपने-अपने लकड़ी के रथों पर बिठाए जाने से पहले, देवता तीनों नए बने भव्य रथों - नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन - की परिक्रमा करेंगे। 
  • इसके बाद, देवताओं को गुंडिचा मंदिर की अपनी सालाना यात्रा के लिए औपचारिक रूप से उनके सिंहासन (रथ बीजे) पर विराजमान किया जाएगा। 
  • देवताओं को रथों पर स्थापित करने के बाद, रथ यात्रा की दो सबसे महत्वपूर्ण रस्में निभाई जाएंगी। 

रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी में कौन करता है पहली पूजा

  • गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य, स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, अपने शिष्यों के साथ तीनों रथों पर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे। 
  • इसके बाद, पुरी के राजा (नाममात्र के) गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब एक शाही पालकी में आएंगे और 'रथों की सफाई की रस्म पूरी करेंगे।
  •  यह रस्म ईश्वर के सामने सभी के बराबर होने का प्रतीक है। 

सोने के झाड़ू से तीनों रथों में लगता है झाड़ू

  • गजपति महाराजा सोने के हत्थे वाली झाड़ू से तीनों रथों के मंचों पर झाड़ू लगाएंगे और सुगंधित पवित्र जल का छिड़काव करेंगे। 
  •  इन शाही रस्मों के पूरा होने और रथों में लकड़ी के घोड़े लगाए जाने के बाद, दोपहर करीब 2 बजे से श्रद्धालु रथों को खींचना शुरू करेंगे। 
  • सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ 'तालध्वज' आगे बढ़ेगा। 
  • उसके बाद देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन' और आखिर में भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष' बड़दंडा पर गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ेगा। (एएनआई)