ED Raid News: टेरर फंडिंग, अवैध घुसपैठ और करोड़ों के संदिग्ध विदेशी लेनदेन का बड़ा नेटवर्क! यूपी ATS की FIR के बाद ED ने 13 ठिकानों पर छापे मारे। क्या अब सामने आएंगे पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड?
लखनऊ: जब देश की सुरक्षा पर विदेशी सिंडिकेट और टेरर फंडिंग का साया मंडराने लगे, तो जांच एजेंसियों का एक्शन भी बेहद आक्रामक हो जाता है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह तड़के देश के विभिन्न कोनों में एक साथ हल्ला बोलकर आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। लखनऊ जोनल ऑफिस की अगुवाई में शुरू हुए इस सर्च ऑपरेशन ने देश की राजधानी दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल की सीमाओं तक हड़कंप मचा दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ पैसों की हेराफेरी की नहीं है, बल्कि देश की संप्रभुता को अंदर से खोखला करने वाली एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश की परतें खोलती है।
फर्जी दस्तावेजों से बसाए जा रहे थे लोग? ATS की FIR में गंभीर आरोप
यूपी ATS की एफआईआर के अनुसार, जांच में सामने आया कि कथित गिरोह केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं था। आरोप है कि एक संगठित गिरोह कथित रूप से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने और देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें बसाने में मदद कर रहा था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज मामले में की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला उत्तर प्रदेश एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है।
कोडनेम 'ECIR/LKZO/14/2024': फाइलों में छिपा वो खतरनाक सच
जांच की शुरुआत एक गोपनीय फाइल और उस पर दर्ज नंबर-ECIR/LKZO/14/2024-से हुई। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत दर्ज इस मामले ने जब रफ़्तार पकड़ी, तो इसके तार सीधे उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधक शाखा (UP ATS) की एक एफआईआर से जुड़ गए। एटीएस को अपनी शुरुआती जांच में एक ऐसे बेहद संगठित और शातिर सिंडिकेट की भनक लगी थी, जो भारत की सीमाओं में घुसपैठ का सबसे बड़ा ठेकेदार बना हुआ था। इस सिंडिकेट का जाल इतना गहरा था कि देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में भी इसके नेटवर्क फैले हुए थे।
'म्यूल अकाउंट्स' का मकड़जाल: कैसे आया करोड़ों का अवैध विदेशी फंड?
- ईडी की वित्तीय जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
- यह सिंडिकेट सिर्फ सीमा पार से इंसानों को अवैध रूप से भारत में नहीं ला रहा था, बल्कि इसके पीछे करोड़ों रुपयों का एक वित्तीय नेटवर्क काम कर रहा था।
- जांच के दौरान सामने आया कि कुछ तथाकथित चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं इस खूनी खेल का मुखौटा बनी हुई थीं।
- इन संस्थाओं को विदेशों से भारी-भरकम और अवैध चंदा (फॉरेन फंडिंग) मिलता था।
- ट्रैकिंग से बचने के लिए इस पैसे को सीधे मुख्य खातों में भेजने के बजाय 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे बेकसूर या फर्जी लोगों के नाम पर खोले गए खाते) में ट्रांसफर किया जाता था।
- कई लेयर्स (चरणों) में लेनदेन करके इस पैसे की असली पहचान को पूरी तरह छिपा दिया जाता था और अंत में इस मोटी रकम को बैंक से कैश (नकद) निकालकर ठिकाने लगाया जाता था।
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पहचान की चोरी और पुनर्वास का सीक्रेट मिशन
आखिर इस करोड़ों के फंड का इस्तेमाल किसलिए हो रहा था? इसका जवाब किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। इस फंडिंग का मुख्य उद्देश्य रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करवाना था। बात यहीं खत्म नहीं होती, सिंडिकेट इन अवैध प्रवासियों के लिए भारत के असली और पुख्ता दिखने वाले नकली पहचान दस्तावेज (जैसे आधार, वोटर कार्ड आदि) तैयार करवाता था। इन फर्जी सरकारी दस्तावेजों के दम पर उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में इस तरह बसाया जा रहा था ताकि वे कभी पकड़े न जा सकें। यह सीधे तौर पर देश की जनसांख्यिकी (Demography) को बदलने और आंतरिक अशांति फैलाने की एक गहरी साजिश थी।
चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं भी जांच के दायरे में
ईडी की जांच में कुछ धर्मार्थ ट्रस्टों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। एजेंसी को संदेह है कि कुछ संस्थाओं ने विदेशी चंदे का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया। जांचकर्ताओं का आरोप है कि कई बैंक खातों, लेयर्ड ट्रांजैक्शन और म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से धन का प्रवाह किया गया, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और उपयोग को छिपाया जा सके। फिलहाल एजेंसी इन वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
यूपी से बंगाल तक रेड: क्या हाथ लगे हैं बड़े राजदार?
आज की कार्रवाई में ईडी की टीमों ने उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के संवेदनशील इलाकों में फैले 13 ठिकानों को पूरी तरह से सील कर दिया है। छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज, डिजिटल सबूत और संदिग्धों के बैंक खातों के ब्योरे जब्त किए गए हैं। शुरुआती जांच में मिले सुराग बताते हैं कि इस सिंडिकेट को सीमा पार से भी सीधे निर्देश मिल रहे थे। ईडी अब उन बड़े चेहरों और सफेदपोशों की पहचान करने में जुटी है, जो इस पूरे टेरर फंडिंग और घुसपैठ के नेटवर्क को बैकस्टेज से फाइनेंस और संरक्षण दे रहे थे। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।
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