Sonam Wangchuk: क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी डॉक्टर गीतांजलि जे आंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इस दौराैन उन्होंने कई खुलासे करते हुए कई बड़े आरोप लगाए हैं।
नई दिल्ली [भारत], 19 जुलाई (ANI): क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की पत्नी डॉक्टर गीतांजलि जे आंगमो ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मांग की है कि वांगचुक को तुरंत सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दी जाए और परिवार की पसंद के किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करने की इजाजत मिले। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर वांगचुक को "गैर-कानूनी और असंवैधानिक तरीके से कैद" करके रखा गया है।
सोनम वांगचुक से क्यों दूसरे लोगों से मिलने नहीं दिया जा रहा
संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दायर इस याचिका में गीतांजलि ने मांग की है कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखना गैर-कानूनी घोषित किया जाए क्योंकि यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी मांग की है कि परिवार, वकीलों और उन डॉक्टरों को वांगचुक से बिना रोक-टोक मिलने दिया जाए जो अनशन के दौरान उनकी सेहत पर नजर रख रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने वांगचुक के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड सौंपने और एक स्वतंत्र मेडिकल जांच की इजाजत देने की भी अपील की है।
परिवार को बिना वांगचुक को ले गए अस्पताल
याचिका के मुताबिक, सोनम वांगचुक NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली के खिलाफ छात्रों के समर्थन में 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। 18 जुलाई को उन्हें जबरन प्रदर्शन वाली जगह से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यह सब बिना उनकी सहमति या परिवार को पहले से बताए किया गया।
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची वांगचुक की पत्नी गीतांजलि
- याचिका में कहा गया है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के 16 जुलाई के एक आदेश की आड़ में की गई। जबकि उस आदेश में सिर्फ डॉक्टरों की राय के आधार पर रोजाना मेडिकल जांच और जरूरी दखल देने की बात कही गई थी।
- याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि न तो वांगचुक और न ही उनकी पत्नी उस जनहित याचिका का हिस्सा थे, जिसमें हाई कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल का यह भरोसा दर्ज किया था कि सरकारी डॉक्टर वांगचुक की सेहत पर रोजाना नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर मेडिकल मदद देंगे।
- याचिका में तर्क दिया गया है कि कोर्ट के आदेश में उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाने या अस्पताल में कैद रखने का कोई अधिकार नहीं दिया गया था।
- गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि जब वांगचुक को हटाया गया, तब उनके सभी वाइटल पैरामीटर स्थिर थे और प्रदर्शन स्थल पर भी क्वालिफाइड डॉक्टर उनकी देखरेख कर रहे थे। उनका दावा है कि ऐसी कोई मेडिकल इमरजेंसी नहीं थी, जिसके लिए यह कदम उठाना जरूरी था। उन्हें इस बारे में अधिकारियों ने नहीं, बल्कि एक वॉलंटियर ने जानकारी दी।
पत्नी का अस्पताल पर एक बड़ा आरोप
- याचिका में वांगचुक के पोटैशियम लेवल में गड़बड़ी का एक बड़ा आरोप भी लगाया गया है। इसके मुताबिक, अस्पताल ने परिवार को बताया कि उनका पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जबकि एक दिन पहले की रिपोर्ट में यह 4.3 था।
- याचिका में कहा गया है कि बार-बार अनुरोध करने के बाद, अस्पताल ने करीब 10.5 घंटे बाद वांगचुक का ब्लड सैंपल दिया। इसके बाद एक प्राइवेट लैब ने जांच में उनका पोटैशियम लेवल 3.6 पाया। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे उनके अस्पताल में भर्ती रहने के मेडिकल आधार पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
- याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि तीन बार लिखित में देने के बावजूद, अस्पताल अधिकारियों ने वांगचुक को डिस्चार्ज करने या प्राइवेट मेडिकल सुविधा में ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया। यह भी दावा किया गया है कि उनके वकीलों और अनशन के दौरान उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों को भी मिलने से रोका गया, जबकि परिवार को सिर्फ चुनिंदा मेडिकल जानकारी ही दी गई।
- याचिका में कहा गया है कि वांगचुक को न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही किसी न्यायिक आदेश के तहत हिरासत में रखा गया है। अधिकारी "मेडिकल दखल" का बहाना बनाकर उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोक रहे हैं। यह संविधान के आर्टिकल 19 और 21 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता, शारीरिक स्वायत्तता, सूचित सहमति और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों का उल्लंघन है।


