Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की मॉनिटरिंग से इनकार करते हुए SIT में चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल करने का आदेश दिया। अदालत ने दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी।

राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने जांच की प्रत्यक्ष निगरानी (मॉनिटरिंग) करने से इनकार करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, सही और पारदर्शी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से कोर्ट ने गठित की जा रही विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (फॉरेंसिक ऑडिटर) को शामिल करने का आदेश दिया है, ताकि वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच हो सके।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से जांच की निगरानी करने का अनुरोध किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह जांच की मॉनिटरिंग नहीं करेगा, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। साथ ही एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

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कैसे होगी SIT की जांच?

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुझाए गए अधिकारियों के आधार पर एसआईटी का गठन किया जा रहा है। टीम का नेतृत्व एस. किरण करेंगे, जबकि इसमें DIG, IG और SP स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट या फॉरेंसिक ऑडिटर को भी टीम का सदस्य बनाया जाए, जिससे वित्तीय रिकॉर्ड और चंदे के लेनदेन की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

याचिकाकर्ता ने उठाई पारदर्शिता की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि देशभर के लोगों ने ₹100 और ₹500 जैसी छोटी-बड़ी राशि दान की थी, लेकिन आरोप है कि पूरी रकम ट्रस्ट तक नहीं पहुंची। उन्होंने ट्रस्ट की सभी रसीदें वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि पहले एसआईटी अपनी रिपोर्ट पेश करे, उसके बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा।

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